गाजा में हमास के हथियार डालने पर सस्पेंस
गाजा पट्टी में शांति समझौते का दूसरा चरण: हमास हथियार डालने और गाजा से हटने को तैयार, लेकिन इजरायल की चुप्पी से सस्पेंस बढ़ा
रिपोर्ट: सोनू कुमार (पत्रकार)
गाजा पट्टी में पिछले कई महीनों से जारी खूनी जंग और मानवीय संकट के बीच एक ऐतिहासिक लेकिन बेहद जटिल मोड़ आया है। मिस्र की राजधानी काहिरा में अमेरिका, कतर, तुर्की और मिस्र की मध्यस्थता में चल रही उच्चस्तरीय वार्ता के बाद यह खबर आई है कि हमास हथियार डालने (Disarm) और गाजा का प्रशासनिक नियंत्रण छोड़ने के लिए तैयार हो गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) के माध्यम से हमास के साथ इस “ऐतिहासिक समझौते” की आधिकारिक घोषणा की है। हालांकि, इस अभूतपूर्व विकास के बावजूद इजरायल और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ओर से बनी आधिकारिक चुप्पी और गाजा में जारी ताजा हमलों ने इस पूरी योजना पर संशय के बादल मंडरा दिए हैं।
क्या है 20-सूत्रीय शांति योजना और हमास का रोडमैप?
हमास द्वारा हथियार सौंपने का निर्णय उसके इतिहास में सबसे बड़ा नीतिगत बदलाव माना जा रहा है। अमरीकी मध्यस्थों द्वारा तैयार इस चरणबद्ध योजना (Phased Roadmap) की प्रमुख शर्तें निम्नलिखित हैं:
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निःशस्त्रीकरण (Disarmament): हमास अपने भारी हथियार, रॉकेट और सैन्य बुनियादी ढांचे (सुरंग नेटवर्क) को बंद करेगा और अपने हथियार ‘राष्ट्रीय गाजा प्रशासनिक समिति’ (NCAG) – जो कि एक गैर-राजनीतिक तकनीशियन निकाय होगी – के सुपुर्द करेगा। ये हथियार इजरायल या किसी तीसरे देश को नहीं सौंपे जाएंगे।
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अंतरराष्ट्रीय बल की तैनाती: गाजा में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक ‘अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल’ (International Stabilization Force) की तैनाती की जाएगी, जो नई फिलिस्तीनी पुलिस को प्रशिक्षित करेगी।
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इजरायली सेना की वापसी: जैसे-जैसे हमास का निःशस्त्रीकरण पूरा होगा, वैसे-वैसे इजरायली सेना गाजा के उन 60% हिस्सों से चरणबद्ध तरीके से पीछे हटेगी जिन पर वर्तमान में उसका नियंत्रण है।
आखिर क्यों चुप है इजरायल और क्या है पेंच?
हमास के राजी होने के बावजूद युद्ध विराम पूरी तरह लागू नहीं हो पा रहा है, जिसके पीछे कई गहरे राजनीतिक और सामरिक कारण हैं:
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नेतन्याहू पर घरेलू राजनीतिक दबाव: इजरायल में आगामी चुनावों को देखते हुए प्रधानमंत्री नेतन्याहू के दक्षिणपंथी गठबंधन सहयोगी (जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर) इस डील का कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि जब तक हमास का नामोनिशान पूरी तरह न मिट जाए, तब तक सेना को पीछे हटाना इजरायल की सुरक्षा से समझौता होगा।
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संदेह और सत्यापन (Trust Deficit): इजरायल को संदेह है कि हमास वास्तव में अपने सारे हथियार सरेंडर करेगा या नहीं। इजरायली अधिकारियों का गुप्त रूप से कहना है कि “जब तक पूर्ण निःशस्त्रीकरण जमीन पर नहीं दिखता, सेना 1 इंच भी पीछे नहीं हटेगी”।
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काहिरा वार्ता के बीच भी हमले: काहिरा में शांति वार्ता के दौरान भी गाजा में इजरायली हवाई हमले जारी रहे, जिसमें दो बच्चों समेत छह बेकसूर फिलिस्तीनियों की मौत हो गई, जो यह दर्शाता है कि जमीन पर जंग की विभीषिका अभी थमी नहीं है।
आगे क्या होगा?
अमेरिकी विदेश मंत्रालय और मध्यस्थ देशों का मानना है कि इस योजना को पूरी तरह जमीन पर उतरने में 200 से 350 दिनों का समय लग सकता है। हालांकि, जब तक इजरायल औपचारिक रूप से इस रोडमैप पर हस्ताक्षर या सहमति व्यक्त नहीं करता और सैन्य हमले पूरी तरह नहीं रोकता, तब तक गाजा में स्थायी शांति की उम्मीदें अधर में ही लटकी रहेंगी।
- सीनियर एडिटर गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
रिपोर्ट: विशेष जांच एवं क्राइम ब्यूरो, ऑल राइट्स मैगजीन, लक्ष्मी नगर, दिल्ली


