नवाबगंज में गन्ना किसानों का महाधरना

नवाबगंज: ओसवाल गन्ना किसानों के बकाया भुगतान पर प्रशासन लाचार; एडवोकेट सुनीता गंगवार की चेतावनी- ‘सब्र न आजमाएं, जन आंदोलन होगा’

(नवाबगंज): ओसवाल चीनी मिल के गन्ना किसानों के पिछले दो वर्षों के बकाया भुगतान की मांग को लेकर क्षेत्र के किसानों का आक्रोश भड़क उठा है। ‘पैनी नजर’ सामाजिक संस्था की अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता सुनीता गंगवार के नेतृत्व में सोमवार (18 मई) को सैकड़ों की संख्या में किसानों ने तहसील परिसर में डेरा डाल दिया। सुबह से शुरू हुआ किसानों का जमावड़ा देर शाम तक महाधरने में तब्दील हो गया, जिससे स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया।

प्रशासन के पास नहीं था ‘निराधार आपत्ति’ का कोई जवाब

संस्था अध्यक्ष सुनीता गंगवार ने अधिकारियों को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि मण्डलायुक्त (कमिश्नर) द्वारा भुगतान प्रक्रिया पर जो ‘निराधार आपत्ति’ लगाकर रोक लगाई गई है, उसका जवाब कमिश्नर खुद आकर किसानों को दें।

  • भुगतान रोकने की साजिश: आरोप है कि इस आपत्ति में एक भी वैधानिक (कानूनी) बिंदु नहीं है, बल्कि यह सिर्फ किसानों का पैसा रोकने की एक प्रशासनिक साजिश है।

  • अधिकारियों ने बनाई दूरी: वैधानिक आधार न होने के कारण नवाबगंज तहसील का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी पूरे दिन किसानों के तीखे सवालों का सामना करने की हिम्मत नहीं जुटा सका और उनके सामने आने से कतराता रहा।

“कमजोर पर शासन करना चाहती है सरकार”

धरने को संबोधित करते हुए एडवोकेट सुनीता गंगवार ने सत्ता और सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा:

“आज की सरकार और सत्ता पक्ष के नेताओं की यह सोची-समझी मंशा है कि किसानों को आर्थिक और मानसिक रूप से इतना कमजोर कर दो कि वे अपने हक के लिए आवाज न उठा सकें। वे चाहते हैं कि किसानों को हर अन्याय सहने की आदत पड़ जाए, क्योंकि कमजोर और लाचार जनता पर शासन करना बेहद आसान होता है।”

बैकफुट पर आया प्रशासन, 21 मई को कमिश्नर से वार्ता

शाम तक जब भारी संख्या में किसान तहसील परिसर में डटे रहे, तो मजबूर होकर नवाबगंज प्रशासन के अधिकारियों को धरना स्थल पर आना पड़ा। हालांकि, अधिकारियों ने अपनी लाचारी व्यक्त करते हुए कहा कि मामला उच्च स्तर का है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि वे उच्चाधिकारियों से वार्ता कर नीलामी की प्रक्रिया को दोबारा शुरू कराने का पूरा प्रयास कर रहे हैं।

प्रशासन के अनुरोध और किसानों के हक को देखते हुए संस्था अध्यक्ष सुनीता गंगवार ने निर्णय लिया है कि वे 21 मई को किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ स्वयं मण्डलायुक्त से मुलाकात करेंगी और वस्तुस्थिति से अवगत कराएंगी।

आक्रामक रुख अख्तियार कर सकता है आंदोलन

सुनीता गंगवार ने नवाबगंज प्रशासन को कड़े लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक हर एक किसान के बैंक खाते में उसका बकाया भुगतान नहीं पहुंच जाता। तब तक प्रशासन भी चैन की नींद नहीं सो पाएगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन किसानों के सब्र का इम्तिहान न ले; यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो यह आक्रोश एक उग्र जन आंदोलन का रूप ले लेगा, जिससे क्षेत्र की कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है और इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।


बरेली से अमरजीत की रिपोर्ट

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,सीनियर एडिटर

(Allrights Magazine)


 

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