राज्य सरकारों की पहल से चमका युवाओं का वैश्विक भविष्य, बढ़ा रेमिटेंस
“ग्लोबल जॉब मार्केट में भारत के युवाओं का डंका: राज्य सरकारों का ‘सुरक्षित विदेश रोजगार मॉडल’; इजरायल से लेकर जापान-जर्मनी तक खुल रहे राह”
नई दिल्ली: देश के युवाओं के सपनों और महत्वाकांक्षाओं की उड़ान अब केवल देश के बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रही है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड जैसी राज्य सरकारों के दूरदर्शी प्रयासों से भारत का युवा अब वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा और कौशल का परचम लहरा रहा है। राज्य सरकारें युवाओं को विदेश में केवल रोजगार ही उपलब्ध नहीं करा रहीं, बल्कि तकनीकी कौशल, भाषा ज्ञान, मुफ्त पासपोर्ट से लेकर सुरक्षित प्रवासन और 24×7 हेल्पलाइन की एकीकृत व्यवस्था विकसित कर रही हैं।
विदेशों में मिलने वाली बेहतर सैलरी और सुरक्षित माहौल का सीधा फायदा युवाओं के परिवारों के जीवन स्तर में सुधार और देश की अर्थव्यवस्था में ‘विदेशी मुद्रा भंडार’ (Remittances) की बढ़ोतरी के रूप में सामने आ रहा है।
इजरायल में यूपी के श्रमिकों ने रचा इतिहास: 1400 करोड़ का रेमिटेंस
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा युवाओं को वैश्विक स्तर पर भेजने के मॉडल का सबसे असरदार उदाहरण इजरायल में देखने को मिल रहा है:
-
डेढ़ से दो लाख प्रतिमाह की आय: उत्तर प्रदेश से इजरायल भेजे गए 6,000 से अधिक निर्माण श्रमिक आज हर महीने 1.5 लाख से 2 लाख रुपये तक कमा रहे हैं।
-
1400 करोड़ रुपये भेजे घर: इन श्रमिकों ने महज एक साल में करीब 1,400 करोड़ रुपये अपने परिवारों को वापस भेजे हैं, जिससे राज्य के ग्रामीण व शहरी इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भारी मजबूती मिली है।
-
आगामी चरण: राज्य सरकार 1,336 और श्रमिकों को प्रशिक्षित कर भेजने की प्रक्रिया में जुटी है, जबकि रेनोवेशन क्षेत्र के 245 अन्य श्रमिकों को भी तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा जापान, जर्मनी और सऊदी अरब में नर्सिंग, केयरगिवर, फैब्रिकेशन और मैकेनिकल क्षेत्र में 6 हजार से अधिक अवसर पैदा हुए हैं।
भाषा प्रशिक्षण, मुफ्त पासपोर्ट और फर्जी एजेंटों पर नकेल
युवाओं को विदेशों में शोषण और फर्जी एजेंटों के चंगुल से बचाने तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरने के लिए राज्यों ने विशेष नीतियां लागू की हैं:
-
उत्तर प्रदेश (UP): विदेश जाने वाले श्रमिकों की सहायता के लिए ‘लोकल गार्जियन’ जैसी व्यवस्था और 24 घंटे काम करने वाला इंटीग्रेटेड कॉल सेंटर शुरू किया जा रहा है। साथ ही जर्मन और जापानी भाषाओं की विशेष कक्षाएं चलाई जा रही हैं।
-
हरियाणा (HKRNL Model): हरियाणा कौशल रोजगार निगम को राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) से बाकायदा रिक्रूटमेंट एजेंट का लाइसेंस प्राप्त है। हरियाणा सरकार ने कॉलेजों के अंतिम वर्ष के छात्रों को मुफ्त पासपोर्ट देने की सुविधा शुरू की है। इसके अलावा जापान के फुकुओका प्रीफेक्चर के साथ अगले 5 वर्षों में 50,000 युवाओं को तकनीकी और विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार दिलाने का ऐतिहासिक समझौता हुआ है।
-
मध्य प्रदेश & राजस्थान: मध्य प्रदेश अपने ‘ग्लोबल स्किल पार्क’ के जरिए प्रशिक्षण लागत का 70% तक खुद वहन कर रहा है, जबकि राजस्थान प्रतिवर्ष 1,000 युवाओं को जापानी, कोरियन, जर्मन, फ्रेंच और स्पेनिश भाषाओं का प्रशिक्षण दे रहा है।
-
उत्तराखंड: उत्तराखंड सरकार 2023 से अब तक 150 से अधिक युवाओं को जापान, सऊदी अरब, जर्मनी और यूएई में निश्शुल्क आवास व भोजन की सुविधा वाले जॉब्स में भेज चुकी है।
बदल रहा है भारत का एम्प्लॉयमेंट मॉडल
राज्य सरकारों की इस पहल ने साबित कर दिया है कि यदि युवाओं को सही भाषा, तकनीकी स्किल और कानूनी सुरक्षा का कवच दिया जाए, तो भारत का हुनर पूरी दुनिया की मैनपावर जरूरतों को पूरा कर सकता है। यह मॉडल न केवल युवाओं का भविष्य उज्ज्वल कर रहा है, बल्कि ‘विकसित भारत’ की आर्थिक आत्मनिर्भरता का भी एक मजबूत स्तंभ बन रहा है।
‘ऑल राइट्स मैगजीन’ देश के युवाओं को वैश्विक अवसर प्रदान करने और राज्यों के इस क्रांतिकारी रोजगार मॉडल की सराहना करती है।
1987 J&K चुनाव और ‘वोट चोरी’ पर राजनीतिक घमासान, इतिहास से घेराबंदी
