सहजन के नैनो पार्टिकल्स से शुद्ध होगी मिट्टी
रुहेलखंड विवि का बड़ा शोध: सहजन के नैनो पार्टिकल्स से 2.5 गुना बढ़ी मिट्टी शुद्ध करने की क्षमता
बरेली (उत्तर प्रदेश): महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के पादप विज्ञान विभाग की शोधार्थी अमिता ने पर्यावरण संरक्षण और कृषि योग्य भूमि को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। उन्होंने मोरिंगा (सहजन) की पत्तियों से निर्मित ग्रीन नैनो पार्टिकल्स का उपयोग कर सूरजमुखी के पौधे की मिट्टी से भारी धातुओं और प्रदूषण को अवशोषित करने की क्षमता को 2.5 गुना बढ़ा दिया है।
यह नवोन्मेषी अध्ययन औद्योगिक अपशिष्ट, खनन और अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से जहरीली हो चुकी जमीनों को प्राकृतिक व पर्यावरण-अनुकूल (Eco-friendly) तरीके से शुद्ध करने में गेम-चेंजर साबित होगा।
डॉ. विजय कुमार सिन्हाल के निर्देशन में 3 साल का शोध
यह शोध कार्य एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विजय कुमार सिन्हाल के कुशल निर्देशन में तीन वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद पूरा हुआ है:
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ग्रीन सिंथेसिस तकनीक: इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जिंक ऑक्साइड नैनो पार्टिकल्स के निर्माण में किसी भी विषैले रासायनिक पदार्थ का प्रयोग नहीं किया गया। इसके बजाय सहजन (मोरिंगा) की पत्तियों के अर्क का उपयोग करके इन्हें पूरी तरह प्राकृतिक रूप से तैयार किया गया।
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प्रयोग की विधि: शोध के दौरान इन नैनो पार्टिकल्स को सूरजमुखी के पौधे की जड़ों में मिलाया गया और पौधे के फूलों पर स्प्रे किया गया।
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परिणाम और प्रभाव: नैनो पार्टिकल्स के प्रभाव से सूरजमुखी के पौधे ने मिट्टी में मौजूद जहरीली भारी धातुओं (Heavy Metals) को तेजी से अवशोषित कर लिया, जिससे दूषित मिट्टी वापस अपने मूल उपजाऊ रूप में लौटने लगी।
मानव स्वास्थ्य और खेती के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह शोध?
वर्तमान में देश के विभिन्न हिस्सों में औद्योगिक कचरे और रासायनिक खादों की वजह से खेतों में जहरीले तत्वों की मात्रा खतरनाक स्तर तक बढ़ रही है, जिससे उगाई जाने वाली फसलों के सेवन से इंसानों में गंभीर बीमारियां पनप रही हैं:
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सुरक्षित खाद्य चक्र: मिट्टी से जहरीले तत्वों के खत्म होने पर विष-मुक्त और सुरक्षित फसलें उगेंगी, जिससे मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहा प्रतिकूल प्रभाव रुकेगा।
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लागत प्रभावी व प्राकृतिक समाधान: महंगे व हानिकारक रसायनों के बजाय सहजन जैसे सुलभ पौधे से तैयार नैनो पार्टिकल्स का प्रयोग भारतीय किसानों के लिए अत्यंत किफायती और सुलभ होगा।
‘ऑल राइट्स मैगजीन’ शोधार्थी अमिता और डॉ. विजय कुमार सिन्हाल को इस दूरगामी व पर्यावरण-हितैषी वैज्ञानिक उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई देती है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)
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