बड़ी बहन की हत्यारिन छोटी बहन को उम्रकैद
अवैध संबंध में बड़ी बहन की हत्या करने वाली कलंकी बहन को 13 साल बाद उम्रकैद, 20 हजार जुर्माना
बरेली (उत्तर प्रदेश): अवैध संबंधों के खूनी खेल और रिश्ते के कत्ल के 13 साल पुराने चर्चित मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम विजेंद्र त्रिपाठी की अदालत ने अपनी ही सगी बड़ी बहन की बेरहमी से हत्या करने वाली दोषी छोटी बहन को उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
मामले में सह-आरोपी और मृतका के पति (जीजा) की फैसले से पहले ही वर्ष 2023 में मौत हो चुकी है।
18 जून 2011 की खौफनाक वारदात और रची गई झूठी कहानी
घटना थाना भोजीपुरा क्षेत्र के एक गांव की है, जहाँ अवैध संबंधों का भेद खुलने पर इस सनसनीखेज हत्याकांड को अंजाम दिया गया था:
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झूठी कहानी से गुमराह करने की कोशिश: 18 जून 2011 की रात करीब 8:30 बजे 32 वर्षीय मृतका अपनी छोटी बहन के साथ खेत की तरफ गई थी। काफी देर बाद छोटी बहन घबराते हुए घर लौटी और भाइयों को झूठी कहानी सुनाई कि चार बदमाशों ने बड़ी बहन को झाड़ियों में खींचकर मार दिया।
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खून से लथपथ मिला था शव: स्वजनों को खेत में बड़ी बहन का शव मिला। उसके मुंह में कपड़ा और घास ठूंसा हुआ था, सिर पर धारदार हथियार से वार किए गए थे और गले में दुपट्टा कसकर हत्या की गई थी।
पुलिस जांच में खुला जीजा-साली के अवैध संबंधों का राज
भोजीपुरा पुलिस की तफ्तीश में जब परतें खुलीं, तो वारदात का खौफनाक सच सामने आया:
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अवैध संबंध बने हत्या की वजह: मृतका का पति (निवासी पीलीभीत) और उसकी साली के बीच अवैध संबंध थे। बड़ी बहन ने दोनों को रंगे हाथों देख लिया था और विरोध किया था। इसके बाद जीजा-साली ने मिलकर उसे रास्ते से हटाने का षड्यंत्र रचा।
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आला-ए-कत्ल बरामदगी: पुलिस ने दोनों आरोपियों की निशानदेही पर तालाब की झाड़ियों से हत्या में प्रयुक्त चाकू और लोहे का सरिया बरामद कर उन्हें जेल भेजा था।
13 साल बाद न्याय, जीजा की हो चुकी है मौत
मुकदमे की सुनवाई के दौरान वर्ष 2023 में आरोपी पति की मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद मामले में कानूनी कार्रवाई जारी रही:
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अदालत का कड़ा फैसला: साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने छोटी बहन को अपनी सगी बहन की हत्या की साजिश में दोषी पाया और उम्रकैद की सजा सुनाई।
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सजा का संदेश: अदालत का यह निर्णय समाज में रिश्तों की मर्यादा तार-तार करने वाले अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है।
‘ऑल राइट्स मैगजीन’ अदालती फैसले का स्वागत करती है और समाज में नैतिक मूल्यों व न्याय व्यवस्था की मजबूती की हिमायत करती है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)
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