अब इथेनॉल स्टोव से पकेगा खाना
एलपीजी आयात और सब्सिडी घटाने की तैयारी: सरकार जल्द पेश कर सकती है इथेनॉल से चलने वाले कुकिंग स्टोव की नीति
रसोई गैस (LPG) पर देश की निर्भरता और भारी-भरकम सब्सिडी के बोझ को कम करने के लिए केंद्र सरकार एक बड़े वैकल्पिक ऊर्जा मॉडल पर काम कर रही है। सरकार जल्द ही देश में इथेनॉल से चलने वाले कुकिंग स्टोव (Ethanol Cooking Stoves) को बढ़ावा देने के लिए एक नई नीति पेश कर सकती है।
सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए सामने आई जानकारी के अनुसार, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और संबंधित मंत्रालयों द्वारा बायो-फ्यूल (जैव ईंधन) को रसोई तक पहुँचाने की योजना पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
क्या है योजना और क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
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एलपीजी आयात में कटौती: भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। इथेनॉल के उपयोग से रसोई गैस के आयात पर होने वाले अरबों डॉलर के विदेशी मुद्रा खर्च में भारी कमी आएगी।
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सब्सिडी का बोझ होगा कम: सरकार द्वारा एलपीजी सिलेंडरों पर दी जाने वाली सब्सिडी के वित्तीय बोझ को कम करने में भी यह कदम कारगर साबित हो सकता है।
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स्वदेशी और स्वच्छ ईंधन: इथेनॉल एक हरित और नवीकरणीय (Renewable) ईंधन है, जो मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि अवशेषों से तैयार होता है। इससे भारतीय किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
कैसे काम करेंगे इथेनॉल स्टोव?
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विशेष डिजाइन वाले बर्नर: पारंपरिक एलपीजी स्टोव की तुलना में इथेनॉल स्टोव के बर्नर और फ्यूल टैंक को विशेष रूप से डिजाइन किया जाता है, ताकि तरल या जेल-आधारित इथेनॉल सुरक्षित और कुशलता से जल सके।
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प्रदूषण से राहत: इथेनॉल के जलने पर धुआं नहीं निकलता, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं को रसोई के जहरीले धुएं से मुक्ति मिलेगी।
यदि यह नीति जमीनी स्तर पर लागू होती है, तो फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (Flex-Fuel Vehicles) के बाद रसोई घर में इथेनॉल का इस्तेमाल भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव साबित होगा।
- (गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)
(एडिटर (Allrights Magazine)

