चंदा चोरी पर शंकराचार्य का बड़ा बयान
छिंदवाड़ा में शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती का बड़ा बयान: ‘राम मंदिर चंदा चोरी’ मामले पर जताई तीखी नाराजगी; “सनातन बोर्ड” बनाने की मांग
छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश):
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा पहुंचे द्वारिका शारदा पीठ के जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज ने राम मंदिर चंदा चोरी और धार्मिक स्थलों पर हो रहे भ्रष्टाचार के मामलों पर बेहद तीखी और बेबाक प्रतिक्रिया दी है। शंकराचार्य ने कहा कि लोगों ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि राम मंदिर जैसी परम पवित्र और पूजनीय जगहों पर भी इस तरह का भ्रष्टाचार देखने को मिल सकता है।
💔 “आस्था की बलि दी जा रही है, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण”
शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने मंदिर प्रबंधन और ट्रस्टों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा:
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मेहनत की कमाई का हो सदुपयोग: देश-दुनिया के आम श्रद्धालु अपनी गाढ़ी और मेहनत की कमाई भगवान के चरणों में पूरी श्रद्धा के साथ अर्पित करते हैं। ऐसे पवित्र धन का सदुपयोग केवल धर्म और लोक कल्याण के कार्यों में होना चाहिए, न कि इसका इस्तेमाल निजी स्वार्थ के लिए हो।
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हिंदू समाज की आस्था को ठेस: मंदिरों के ट्रस्ट, जिम्मेदार अधिकारियों या कर्मचारियों द्वारा वित्तीय गड़बड़ियां और भ्रष्टाचार किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इस तरह की घटनाओं से पूरे हिंदू समाज की धार्मिक भावनाओं और आस्था को गहरी ठेस पहुंची है।
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सुरक्षा पर बड़ा सवाल: उन्होंने चिंता जताते हुए सवाल उठाया कि जब हमारे पावन मंदिर और भगवान का दरबार ही ऐसी अनैतिक गतिविधियों से सुरक्षित नहीं रहे, तो फिर समाज में कौन सी जगह सुरक्षित मानी जाएगी?
📜 “सनातन बोर्ड संरक्षण समिति” के गठन की उठाई मांग
धार्मिक स्थलों को भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी बनाने के लिए शंकराचार्य ने सरकार और समाज के सामने एक बड़ा प्रस्ताव रखा है:
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सरकारी व निजी दखल से मुक्ति: उन्होंने मांग की कि देशभर के प्रमुख मंदिरों को एक विशेष “सनातन बोर्ड संरक्षण समिति” के अधीन लाया जाना चाहिए।
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अलग संचालन व्यवस्था: मंदिरों के सुचारू संचालन, संपत्तियों के संरक्षण और चढ़ावे के सही इस्तेमाल के लिए एक स्वतंत्र व सशक्त धार्मिक व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिसमें केवल संत और सनातन धर्म के विशेषज्ञ शामिल हों।
छिंदवाड़ा में शंकराचार्य द्वारा दिए गए इस बड़े और तल्ख बयान के बाद देश भर में मंदिर प्रबंधनों, धार्मिक न्यासों (Trusts) और संस्थाओं की जवाबदेही व पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर बहस पूरी तरह तेज हो गई है।
(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)
एडिटर (Allrights Magazine)

