‘कक्षा से खेत तक’: जागरूक किसान सशक्त

कक्षा से खेत तक: साक्षरता की नई मिसाल बना ‘खावड़ा 4C पावर’, जागरूक किसान ही सशक्त किसान

विशेष रिपोर्ट: अनिल बेदाग

पालघर/मुंबई: आधुनिक दौर में साक्षरता की परिभाषा अब केवल किताबी पढ़ाई और हस्ताक्षर करने तक सीमित नहीं रह गई है। अपने अधिकारों को सही ढंग से समझना, भूमि व स्वामित्व से जुड़े आवश्यक दस्तावेजों की पारदर्शी जानकारी रखना और सही समय पर सही प्रशासनिक निर्णय लेना ही सच्ची साक्षरता है। खासकर देश के अन्नदाताओं के लिए यह जागरूकता उनकी जमीन, आजीविका और आने वाले सुनहरे भविष्य की सबसे बड़ी ढाल है।

इसी जनकल्याणकारी और सशक्तिकरण की सोच को धरातल पर साकार कर रही है ‘खावड़ा 4C पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड’ (Khavda 4C Power Transmission Ltd.)। कंपनी अपनी महत्वाकांक्षी पावर ट्रांसमिशन परियोजनाओं से प्रभावित और जुड़े किसानों को भूमि मुआवजा प्रक्रिया, स्वामित्व रिकॉर्ड, जरूरी दस्तावेज और ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर की सटीक जानकारी देकर उन्हें स्वावलंबी बना रही है।

भिवंडी तालुका में तीन दिनों में 105 सर्वे नंबरों का हुआ सटीक मानचित्रण किसानों के अधिकारों की रक्षा और पारदर्शी मुआवजा प्रक्रिया को गति देने में भिवंडी तालुका का ‘पोट हिस्सा सर्वेक्षण’ एक मील का पत्थर साबित हुआ है:

  • प्रशासनिक तालमेल: TILR और SDM भिवंडी के त्वरित और सकारात्मक सहयोग से क्षेत्र के 16 में से 15 गांवों में गहन सर्वे अभियान चलाया गया।

  • रिकॉर्ड गति से काम: महज तीन दिनों के भीतर 115 में से 105 सर्वे नंबरों का सफलतापूर्वक मैपिंग (मानचित्रण) पूरा कर लिया गया।

  • सत्यापित रिकॉर्ड और मुआवजा: इस त्वरित प्रक्रिया से किसानों के भू-स्वामित्व के रिकॉर्ड पूरी तरह पारदर्शी और सत्यापित हो गए हैं, जिससे बिना किसी विवाद के किसानों को उनका उचित भूमि मुआवजा मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

‘जागरूकता से दूर होती हैं भ्रांतियां और बढ़ता है भरोसा’: निनाद पितले इस अनूठी पहल के विजन और महत्व पर प्रकाश डालते हुए निनाद पितले (सीनियर वाइस प्रेसिडेंट एवं ग्रुप हेड – कॉर्पोरेट अफेयर्स, खावड़ा 4C पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड) ने कहा:

  • साक्षरता का नया दृष्टिकोण: “साक्षरता सिर्फ पढ़ने और लिखने तक सीमित नहीं है। अपने अधिकारों, जिम्मेदारियों और आजीविका से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को समझना भी उतना ही जरूरी है। क्योंकि हमारा मानना है कि जागरूक किसान ही सही मायनों में सशक्त किसान है।”

  • सकारात्मक संवाद: “किसानों के साथ लगातार और सीधा संवाद कायम रखने से बुनियादी भ्रांतियां खत्म होती हैं। जब किसान को सही जानकारी मिलती है, तो पूरा ग्रामीण समुदाय विकास की प्रक्रिया में अधिक भरोसे, पारदर्शिता और आत्मविश्वास के साथ भागीदार बनता है।”

खावड़ा 4C पावर ट्रांसमिशन की यह पहल यह साबित करती है कि जब कॉरपोरेट नीतियां और प्रशासनिक इच्छाशक्ति किसानों के हितों से जुड़ती हैं, तो प्रगति की एक नई और निष्पक्ष इबारत लिखी जाती है।

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

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