सागर शराब कांड: सियासत गर्म, SIT जांच शुरू
सागर में जहरीली शराब कांड पर राजनीति गर्म: विपक्षी हमलों के बीच सरकार का कड़ा रुख
भोपाल/सागर: मध्य प्रदेश के सागर जिले में संदिग्ध जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के दुखद मामले ने राज्य की राजनीति में उबाल ला दिया है। घटना में कई लोगों की जान जाने और दर्जनों लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की खबरों के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर हड़कंप मच गया है। विपक्षी दलों ने प्रदेश सरकार और प्रशासनिक तंत्र को निशाने पर लेते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए दोषियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
‘शराब माफिया और प्रशासनिक मिलीभगत का आरोप’: विपक्ष के तीखे बाण घटना के सामने आते ही विपक्षी प्रवक्ताओं और राजनीतिक दलों ने सत्तारूढ़ सरकार पर सीधा हमला बोला है:
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गंभीर आरोप: विपक्ष ने इसे महज एक हादसा मानने से इनकार करते हुए आरोप लगाया है कि अवैध और जहरीली शराब का कारोबार प्रशासनिक लापरवाही और कथित मिलीभगत के बिना संभव नहीं है।
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प्रणाली पर सवाल: विपक्षी नेताओं का कहना है कि सुदूर और ग्रामीण अंचलों में पनप रहे शराब माफियाओं पर नकेल कसने में तंत्र पूरी तरह विफल रहा है, जिसके कारण निर्दोष ग्रामीण अपनी जान गंवा रहे हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव का कड़ा एक्शन और प्रशासनिक जांच मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया है:
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उच्चस्तरीय जांच और निलंबन: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों के बाद संबंधित क्षेत्र के आबकारी अधिकारियों और पुलिस कर्मियों पर गाज गिरी है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्चस्तरीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है।
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दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई: सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि अवैध शराब के धंधे में लिप्त किसी भी माफिया या लापरवाह अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। इसके साथ ही अस्पतालों में भर्ती मरीजों का प्राथमिकता के आधार पर इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है।
सागर की इस त्रासद घटना ने एक बार फिर राज्य में अवैध शराब के कारोबार पर पूर्ण प्रतिबंध और कड़े प्रशासनिक नियंत्रण की आवश्यकता को रेखांकित कर दिया है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

