“जॉब मार्केट चमकाओ”: युवाओं ने पूछा नौकरियों का हिसाब

“मेरी डिग्री और 50 लाख नौकरियों का क्या हुआ?”: ‘दीया’ राजनीति के बीच युवाओं का ‘जॉब मार्केट’ चमकाने पर तीखा सवाल

नई दिल्ली: देश में एक तरफ जहां सांस्कृतिक अभियानों और राष्ट्रीय प्रतीकों के माध्यम से नागरिकों को एकजुट करने का प्रयास जारी है, वहीं दूसरी ओर देश की युवा आबादी ने सरकार और प्रशासन के सामने एक तीखा तथा व्यावहारिक सवाल खड़ा कर दिया है। ‘दीया’ जलाने के सरकारी आह्वान के बीच भारतीय युवाओं ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर एक नया नारा बुलंद किया है— “Light up the job market, Modi Ji!” (मोदी जी, हमारे जॉब मार्केट में रोशनी लाइए!)।

हाथों में उच्च शिक्षा की डिग्रियां लिए लाखों बेरोजगार युवा अब केवल प्रतीकात्मक अभियानों से संतुष्ट होने के बजाय अपनी डिग्री की सार्थकता और विज्ञापित 50 लाख सरकारी नौकरियों के क्रियान्वयन पर जवाब मांग रहे हैं।

प्रतीकात्मकता बनाम धरातल का रोजगार संकट

युवाओं और छात्र संगठनों द्वारा उठाए जा रहे इस मुद्दे के पीछे मुख्य तीन चिंताएं और मांगें सामने आ रही हैं:

  • “डिग्री का मोल क्या?”: देश के प्रमुख संस्थानों से पढ़ाई पूरी करने वाले युवाओं का कहना है कि लाखों रुपये खर्च करने और वर्षों की मेहनत के बाद भी उन्हें योग्यता के अनुरूप रोजगार नहीं मिल पा रहा है।

  • 50 लाख सरकारी नौकरियों का हिसाब: विभिन्न चुनावी घोषणाओं, भर्ती आयोगों (SSC, UPSC, Railway, State PSC) द्वारा वर्षों से विज्ञापित और अटकी पड़ी 50 लाख से अधिक रिक्त पदों की बहाली प्रक्रिया को तुरंत पारदर्शी तरीके से पूरा करने की मांग की जा रही है।

  • पेपर लीक और भर्ती देरी: पिछले कुछ समय से देश के अलग-अलग राज्यों में लगातार सामने आए पेपर लीक कांडों और अदालती मुकदमों में फंसी सरकारी भर्तियों ने युवाओं के सब्र का बांध तोड़ दिया है।

“जॉब मार्केट चमकाओ”: युवाओं का डिजिटल और जमीनी अभियान

विद्यार्थियों और बेरोजगार युवाओं का मानना है कि किसी भी देश की असली समृद्धि और रोशनी उसके युवाओं के सुरक्षित भविष्य तथा रोजगार से आती है:

  1. सड़क से सोशल मीडिया तक गूंज: एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर युवा लगातार अपनी डिग्रियों के साथ वीडियो और पोस्ट शेयर कर रहे हैं, जिसमें वे खाली पड़े सरकारी पदों को भरने और निजी क्षेत्र में स्थायी रोजगार के अवसर पैदा करने की मांग कर रहे हैं।

  2. युवा शक्ति का स्पष्ट संदेश: आज का युवा केवल वादों और सांकेतिक अभियानों तक सीमित न रहकर ठोस आर्थिक सुधारों, फेयर रिक्रूटमेंट प्रोसेस और समयबद्ध जॉइनिंग लेटर की गारंटी चाहता है।

‘ऑल राइट्स मैगजीन’ मानती है कि राष्ट्र-निर्माण के किसी भी प्रयास में देश के युवाओं की ऊर्जा, उनकी डिग्रियों का सम्मान और उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान करना सबसे प्राथमिक दायित्व होना चाहिए।

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

मिजोरम यूथ कांग्रेस की बैठक: 25 हजार खाली पदों पर संग्राम!

“खुद भगवान बन बैठे”: सोशल मीडिया पर तीखा तंज

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: