जमुई केस पर प्रियंका का हमला, महिला सुरक्षा पर सवाल
“महिला सुरक्षा बिना विकास के दावे अधूरे”: जमुई केस पर प्रियंका गांधी का हमला; कानून-व्यवस्था और संस्थागत जवाबदेही पर उठे सवाल
नई दिल्ली/वायनाड: बिहार के जमुई जिले में कोचिंग से लौट रही नाबालिग छात्राओं के साथ हुई बदसलूकी और यौन उत्पीड़न की झकझोर देने वाली घटना ने देश में महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस जघन्य वारदात पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस महासचिव व वायनाड सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों पर कड़ा हमला बोला है।
प्रियंका गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “जब तक हम अपनी बेटियों को सड़कों पर सुरक्षा नहीं दे सकते, तब तक बड़ी योजनाओं और विकास के दावों का कोई औचित्य नहीं रह जाता।”
जमुई मामला: घटती सुरक्षा और व्यवस्था की नाकामी पर बड़े सवाल
बिहार के जमुई में हुई इस घटना के वायरल वीडियो ने प्रशासनिक सतर्कता और पुलिस गश्त की पोल खोलकर रख दी है:
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सरेराह सुरक्षा का संकट: कोचिंग संस्थानों, स्कूलों और कार्यस्थलों से लौटने वाली छात्राओं के साथ सार्वजनिक स्थानों पर हो रही बदसलूकी यह दर्शाती है कि असामाजिक तत्वों में पुलिस और कानून का खौफ कम हो रहा है।
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प्रियंका गांधी का वार: उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा का स्वरूप लगातार खतरनाक और हिंसक होता जा रहा है। सरकारों को सिर्फ बड़े विज्ञापनों और योजनाओं तक सीमित रहने के बजाय धरातल पर बेटियों की सुरक्षा का ठोस माहौल तैयार करना चाहिए।
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राष्ट्रीय स्तर पर संज्ञान: इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी कड़ा संज्ञान लिया है और बिहार पुलिस से त्वरित कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।
प्रशासनिक कार्रवाई और पुलिस की भूमिका
जन-आक्रोश और विपक्षी दबाव के बाद स्थानीय प्रशासन हरकत में आया है:
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एसआईटी का गठन और गिरफ्तारियां: जमुई पुलिस ने मामले में पॉक्सो (POCSO) एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है, जिसके तहत 3 संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
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पीड़िता की पहचान छिपाने का निर्देश: सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो वायरल कर नाबालिगों की पहचान उजागर करने वालों के खिलाफ भी पुलिस ने सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
सख्त कानून और तुरंत न्याय ही एकमात्र समाधान
महिला सुरक्षा को किसी राजनीतिक चश्मे या चुनावी वादों तक सीमित नहीं रखा जा सकता:
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फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए त्वरित सजा: ऐसे संवेदनशील मामलों में समयबद्ध जांच पूरी कर फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए दोषियों को कठोरतम सजा दी जानी चाहिए ताकि समाज में उदाहरण स्थापित हो सके।
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सड़कों पर सुरक्षा तंत्र: सार्वजनिक स्थानों, कोचिंग सेंटरों और संवेदनशील मार्गों पर पुलिस पेट्रोलिंग, सीसीटीवी निगरानी और विमेन हेल्पलाइन सिस्टम को और अधिक सक्रिय करने की जरूरत है।
‘ऑल राइट्स मैगजीन’ महिला सुरक्षा, बेटियों की गरिमा और प्रशासनिक जवाबदेही का पूर्ण समर्थन करती है तथा मांग करती है कि जमुई मामले में पीड़ितों को बिना किसी विलंब के त्वरित व निष्पक्ष न्याय दिलाया जाए।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)
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