स्पेशल समरी रिवीजन और Gen Z वोटिंग पर सियासी घमासान
स्पेशल समरी रिवीजन पर रोक और GEN Z पर ज्ञान पर उठे सवाल”: युवा आयोग और चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष का कड़ा हमला
नई दिल्ली: देश में स्वतंत्र और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और विरोध का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दलों और युवा संगठनों द्वारा गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। मामला स्पेशल समरी रिवीजन (Special Summary Revision) प्रक्रिया को दो वर्षों से कथित रूप से रोके जाने और नए युवा मतदाताओं (Gen Z) के नाम जोड़ने में आ रही अड़चनों से जुड़ा हुआ है।
हालिया खुलासों और बढ़ते विरोध के चलते मेरठ और वाराणसी में आयोजित होने वाले सरकारी कार्यक्रमों को स्थगित करना पड़ा है, जिसे लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
स्पेशल समरी रिवीजन पर रोक और युवाओं का भविष्य
प्रत्येक वर्ष स्पेशल समरी रिवीजन के माध्यम से 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले देश के युवाओं का नाम मतदाता सूची में जोड़ा जाता है। इस प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने निम्नलिखित मुख्य मुद्दे उठाए हैं:
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नए मतदाताओं के अधिकारों का हनन: आरोप है कि पिछले दो वर्षों से कई स्थानों पर इस वार्षिक प्रक्रिया में ढिलाई या रोक के कारण लाखों युवा मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने से वंचित हो रहे हैं।
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मेरठ और वाराणसी के कार्यक्रम स्थगित: हाल ही में सामने आए विवादों और विरोध प्रदर्शनों के बाद मेरठ और वाराणसी में होने वाले युवा संवाद कार्यक्रमों को अचानक स्थगित करना पड़ा।
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विरोधाभासी नीतियां: एक तरफ जमीनी स्तर पर युवाओं के वोट जोड़ने की प्रक्रिया में बाधाओं का आरोप है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी तंत्र द्वारा युवा वर्ग को वोटिंग के प्रति जागरूक करने के नाम पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिसे विपक्ष “दिखावा” करार दे रहा है।
संवैधानिक निष्पक्षता की मांग
देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने वाले हर नागरिक को पारदर्शी तरीके से वोटर आईडी कार्ड और मतदान का अधिकार मिले:
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पारदर्शी वोटर लिस्ट रीविजन: विभिन्न राजनीतिक दलों और युवा संगठनों ने मांग की है कि सभी आपत्तियों का तुरंत निपटारा करते हुए मतदाता सूचियों का पारदर्शी रीविजन शुरू किया जाए।
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संवैधानिक संस्थाओं की साख: लोकतंत्र में नागरिकों का विश्वास बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग को निष्पक्ष, त्वरित और सर्वसमावेशी कदम उठाने होंगे।
‘ऑल राइट्स मैगजीन’ देश के युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों, निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया और पारदर्शी मतदाता सूची की बहाली का निरंतर समर्थन करती है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)
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