यूपी में पुलिस ट्रेनिंग क्षमता बढ़कर 60,000 हुई

“6,000 से बढ़कर 60,000 हुई ट्रेनिंग क्षमता”: सीएम योगी ने यूपी पुलिस के आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और महिला सुरक्षा सुधारों को रेखांकित किया

लखनऊ (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और पुलिस बल के आधुनिक बुनियादी ढांचे के कायाकल्प को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य पुलिस की ऐतिहासिक उपलब्धियों को साझा किया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार द्वारा किए गए निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली, क्षमता और इंफ्रास्ट्रक्चर में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।

मुख्यमंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि प्रदेश में पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग क्षमता जो पहले मात्र 6,000 थी, वह अब 10 गुना बढ़कर 60,000 हो चुकी है। इसके साथ ही आधी आबादी की सुरक्षा और भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए महिला पुलिसबल की संख्या भी 10,000 से बढ़कर 44,000 से अधिक पहुँच गई है।

फॉरेंसिक लैब से लेकर कमिश्नरेट व्यवस्था: आधुनिकीकरण की ओर बढ़ते कदम

अपराध अनुसंधान और वैज्ञानिक जांच को गति देने के लिए उत्तर प्रदेश में फॉरेंसिक और प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव किए गए हैं:

  • फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट एवं प्रत्येक रेंज में लैब्स: अपराधों के त्वरित और सटीक वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए राज्य में उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज की स्थापना की गई है। इसके अलावा प्रदेश की प्रत्येक पुलिस रेंज में फॉरेंसिक लैब की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

  • 07 प्रमुख शहरों में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली: महानगरीय पुलिसिंग और त्वरित निर्णय प्रक्रिया को लागू करने के लिए प्रदेश के 07 बड़े शहरों में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था (Police Commissionerate System) सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी है।

  • महिला सुरक्षा और ‘मिशन शक्ति’: महिला पुलिसकर्मियों की संख्या में चार गुना से अधिक की वृद्धि ने थानों और फील्ड में महिला सुरक्षा तथा ‘मिशन शक्ति’ अभियानों को नई धार दी है।

‘मजबूत पुलिस व्यवस्था, सुरक्षित उत्तर प्रदेश’

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, ये सभी नीतिगत और बुनियादी बदलाव उत्तर प्रदेश में दिन-प्रतिदिन मजबूत होती पुलिस व्यवस्था और राज्य में कायम ‘कानून के राज’ को दर्शाते हैं:

  1. अपराध अनुसंधान में तेजी: फॉरेंसिक सुविधाओं और ट्रेनिंग क्षमता के विस्तार से लंबित मामलों का निस्तारण तेजी से हो रहा है और अपराधियों को समयबद्ध तरीके से सजा दिलाई जा रही है।

  2. नागरिक केंद्रित पुलिसिंग: पुलिस कमिश्नरेट और बढ़ी हुई कार्यबल क्षमता से आम नागरिकों, व्यापारियों और महिलाओं में सुरक्षा का वातावरण और अधिक सुदृढ़ हुआ है।

‘ऑल राइट्स मैगजीन’ उत्तर प्रदेश पुलिस बल के इस बहुआयामी आधुनिकीकरण और प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण का अभिनंदन करती है।

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

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