PM मोदी जन्मदिन: बिहार में दीया फरमान पर विवाद
PM मोदी के जन्मदिन पर शाम को स्कूल बुलाकर दीया जलाने का आदेश: बिहार में शिक्षिका के फरमान पर विवाद
पटना/नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 17 सितंबर को आने वाले जन्मदिन पर चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ और ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के बीच बिहार के एक सरकारी विद्यालय से नया विवाद सामने आ गया है। राज्य के एक स्कूल की शिक्षिका (अध्यापिका) द्वारा छोटे-छोटे स्कूली बच्चों को 17 सितंबर की शाम 7 बजे स्कूल परिसर में एकत्र होकर दीया जलाने का फरमान जारी किया गया है।
असमय और स्कूल समय के बाद बच्चों को परिसर में बुलाने के इस मौखिक/प्रशासनिक आदेश को लेकर अभिभावकों और स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
अभिभावकों में नाराजगी: “पढ़ाई ठप, गतिविधियों का आडंबर”
घटना सामने आते ही स्थानीय निवासियों और अभिभावकों ने शिक्षिका की इस कार्यशैली और विभागीय मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं:
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स्कूल समय के बाद बच्चों की सुरक्षा पर सवाल: शाम 7 बजे (अंधेरा होने के बाद) छोटे बच्चों को स्कूल बुलाने पर उनकी सुरक्षा और आवाजाही को लेकर अभिभावक बेहद चिंतित हैं।
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पढ़ाई के गिरते स्तर पर चिंता: ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी स्कूलों में मूलभूत शैक्षणिक गतिविधियों और दैनिक पढ़ाई-लिखाई की गुणवत्ता पर ध्यान देने के बजाय प्रशासनिक चापलूसी और गैर-शैक्षणिक गतिविधियों (Non-Academic Activities) को प्राथमिकता दी जा रही है।
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“जन्मदिन कोई राष्ट्रीय त्यौहार नहीं”: परिजनों का साफ कहना है कि किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक व्यक्तित्व का जन्मदिन कोई सरकारी त्यौहार या शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं है, जिसके लिए बच्चों पर शाम के समय स्कूल आने का दबाव बनाया जाए।
शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन से कार्रवाई की मांग
मामला तूल पकड़ने के बाद अब क्षेत्र के लोगों ने बिहार शिक्षा विभाग और संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से हस्तक्षेप की मांग की है:
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स्पष्टीकरण और जांच की मांग: क्या शिक्षा विभाग द्वारा शाम 7 बजे दीया जलाने का कोई आधिकारिक लिखित आदेश जारी हुआ है या यह शिक्षिका की व्यक्तिगत पहल है, इसकी जांच होनी चाहिए।
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गैर-शैक्षणिक कार्यों पर रोक: सरकारी स्कूलों में बच्चों के शैक्षणिक घंटों के दुरुपयोग को रोकने और केवल निर्धारित पाठ्यक्रम पर ध्यान केंद्रित कराने के लिए सख्त निर्देश जारी किए जाएं।
‘ऑल राइट्स मैगजीन’ मानती है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा, नियमित पठन-पाठन और शैक्षणिक माहौल को किसी भी प्रकार की गैर-जरूरी गतिविधियों से ऊपर रखा जाना चाहिए।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)
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