6 राज्यों में किशाऊ जल परियोजना पर ऐतिहासिक करार

8 दशक पुरानी जल समस्या का ऐतिहासिक समाधान: पीएम मोदी के नेतृत्व में ‘किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना’ पर 6 राज्यों में समझौता

नई दिल्ली: उत्तर भारत के छह राज्यों के बीच पिछले आठ दशकों से लंबित जल और ऊर्जा विवाद पर विराम लगाते हुए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व और अंतर-राज्यीय समन्वय के तहत किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना (Kishau Multipurpose Project) पर छह राज्यों के बीच समझौता पत्र पर हस्ताक्षर हो गए हैं।

यमुना की प्रमुख सहायक नदी ‘टोंस’ (Tons River) पर बनने वाली यह महात्वाकांक्षी परियोजना न केवल उत्तर भारत के विशाल भूभाग को पीने और सिंचाई का पानी मुहैया कराएगी, बल्कि स्वच्छ यमुना और हरित ऊर्जा के सपने को भी साकार करेगी।

6 राज्यों का महासंगम: किशाऊ प्रोजेक्ट के मुख्य आकर्षण

इस ऐतिहासिक परियोजना से देश के छह प्रमुख राज्यों—उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को सीधे तौर पर अप्रत्याशित लाभ मिलेगा:

  • 232.6 मीटर ऊंचा विशाल बांध: हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट बांध बनाया जाएगा।

  • 90% केंद्रीय वित्तीय सहायता: राष्ट्रीय महत्व की इस परियोजना की कुल लागत का 90% हिस्सा केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा, जिससे राज्यों पर वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।

  • 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ बिजली: इस प्रोजेक्ट से 660 मेगावॉट की जलविद्युत क्षमता विकसित होगी, जिससे सालाना 1,476 मिलियन यूनिट हरित बिजली का उत्पादन होगा।

‘संवाद से समाधान’: उत्तर भारत को मिलेंगे ये 3 बड़े फायदे

  1. पीने के पानी और सिंचाई का संकट समाप्त: दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और यूपी के सूखा प्रभावित तथा पेयजल किल्लत वाले इलाकों को निर्बाध जल आपूर्ति होगी।

  2. यमुना नदी का पुनरुद्धार (Clean Yamuna): बांध से निरंतर जल प्रवाह (Environmental Flow) बनाए रखने से यमुना नदी के जलस्तर में सुधार होगा और प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।

  3. बाढ़ नियंत्रण एवं कृषि समृद्धि: मॉनसून के दौरान टोंस और यमुना नदी के तटीय क्षेत्रों में आने वाली विनाशकारी बाढ़ पर प्रभावी नकेल कसेगी।

‘ऑल राइट्स मैगजीन’ अंतर-राज्यीय जल विवादों को संवाद के माध्यम से सुलझाने की इस राष्ट्र-निर्माण पहल का सहर्ष स्वागत करती है।

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

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