अहमदाबाद विमान हादसे का एक साल पूरा
अहमदाबाद विमान हादसे को एक साल पूरा: बीजे मेडिकल कॉलेज हॉस्टल के मलबे और सन्नाटे में आज भी जिंदा है उस खौफनाक मंजर का दर्द
विशेष ग्राउंड रिपोर्ट
(अहमदाबाद): आगामी 12 जून को अहमदाबाद में हुए उस ऐतिहासिक और दिल दहला देने वाले विमान हादसे को पूरा एक साल होने जा रहा है। वक्त का पहिया भले ही आगे बढ़ गया हो, लेकिन बीजे (B.J.) मेडिकल कॉलेज हॉस्टल कैंपस का सन्नाटा और वहां बिखरा मलबा आज भी उस काली तारीख के जख्मों को पूरी तरह ताजा कर देता है [cite: बीजे मेडिकल कॉलेज हॉस्टल के कैंपस में आज भी जली हुई बाइक, मलबे में तब्दील कार और बिखरी किताबें उस खौफनाक मंजर की गवाही दे रही हैं। वक्त भले ही आगे बढ़ गया हो, लेकिन यहां की दीवारें और सन्नाटा आज भी उस दर्दनाक हादसे के जख्मों को ताजा कर देते हैं।]।
एक साल पहले, इसी जगह पर आसमान से ऐसी मौत बरसी थी जिसने पल भर में हंसते-खेलते कैंपस को खंडहर में तब्दील कर दिया। लंदन जा रहा एक विमान तकनीकी खराबी या अनियंत्रित होकर सीधे बीजे मेडिकल कॉलेज हॉस्टल की इमारत से जा टकराया और देखते ही देखते पूरी जगह आग का गोला बन गई। हादसे की बरसी से ठीक तीन दिन पहले जब हमारी टीम ग्राउंड जीरो पर पहुंची, तो वहां का नजारा बेहद भावुक और स्तब्ध करने वाला था [cite: तीन दिनों के बाद इस दर्दनाक हादसे के एक साल पूरे हो जाएंगे, ऐसे में जब हम इस जगह पहुंचे, तो समय भले ही आगे बढ़ गया हो, लेकिन यहां की दीवारें, पेड़ और खंडहर आज भी उस काले दिन के गवाह हैं।]।
कैंपस में बिखरे हैं तबाही के खौफनाक निशान
हॉस्टल कैंपस के भीतर कदम रखते ही ऐसा महसूस होता है जैसे समय एक साल पहले वहीं ठहर गया हो:
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मालिक का इंतजार करती जली बाइक: कैंपस में घुसते ही सबसे पहले धूल की मोटी परत से ढकी एक जली हुई बाइक दिखाई देती है [cite: जैसे ही हम कैंपस में घुसते हैं, सबसे पहले हमें एक जली हुई बाइक दिखती है। धूल की मोटी परत से ढकी यह बाइक किसी का इंतज़ार करती हुई लगती है।]। ज़ंग लगने के कारण किसी महंगी बुलेट जैसी दिखने वाली यह बाइक शायद अपने उस मालिक का इंतजार कर रही है, जो उस दिन के बाद कभी लौटकर वापस नहीं आ सका।
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कार का सिर्फ लोहे का फ्रेम बचा: बाइक से कुछ ही दूरी पर एक कार का कंकाल खड़ा है। भीषण आग के कारण कार के शीशे पूरी तरह टूट चुके हैं, बॉडी काली पड़ चुकी है और अब वहां सिर्फ लोहे का एक खोखला फ्रेम बचा रह गया है।
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मुड़ी सलाखें और खंडहर कमरे: हॉस्टल बिल्डिंग के एक हिस्से पर विमान के टकराने का असर आज भी साफ देखा जा सकता है। टूटी हुई दीवारें, मलबे में दबे कमरे और आग की गर्मी से मुड़ चुकी लोहे की सलाखें उस भयावह तबाही की गवाही दे रही हैं।
चीखती किताबें और सन्नाटा
खंडहर बन चुके कमरों और गलियारों में आज भी छात्रों की बिखरी हुई पुरानी किताबें और टूटी हुई कुर्सियां पड़ी दिखाई देती हैं। चिकित्सा विज्ञान की पढ़ाई कर देश का भविष्य संवारने वाले छात्रों के ये बिखरे पन्ने अब बेजान हो चुके हैं, लेकिन वे यहां आने वाले हर शख्स को उस भयानक हादसे की याद दिलाकर सिहरा देते हैं।
समय भले ही बीत रहा है और लोग अपनी दिनचर्या में आगे बढ़ गए हैं, लेकिन बीजे मेडिकल कॉलेज की ये काली पड़ चुकी दीवारें, झुलसे हुए पेड़ और सन्नाटा हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुके उस दर्द को समेटे खड़े हैं [cite: वक्त भले ही आगे बढ़ गया हो, लेकिन यहां की दीवारें और सन्नाटा आज भी उस दर्दनाक हादसे के जख्मों को ताजा कर देते हैं।, तीन दिनों के बाद इस दर्दनाक हादसे के एक साल पूरे हो जाएंगे, ऐसे में जब हम इस जगह पहुंचे, तो समय भले ही आगे बढ़ गया हो, लेकिन यहां की दीवारें, पेड़ और खंडहर आज भी उस काले दिन के गवाह हैं।]।
(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)
एडिटर (Allrights Magazine)

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