मुंबई बना दिल के इलाज का नया हब

हार्ट केयर में मुंबई की बड़ी छलांग: TAVR तकनीक से 2-3 दिन में मिल रही नई जिंदगी; ओपन हार्ट सर्जरी का झंझट खत्म!

मुंबई अब सिर्फ देश की आर्थिक राजधानी नहीं, बल्कि उन्नत और आधुनिक हृदय उपचारों (Heart Care) का भी देश में सबसे प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। शहर में ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट (TAVR) और अन्य मिनिमली इनवेसिव कार्डियक (कम चीर-फाड़ वाली) प्रक्रियाओं में पिछले एक वर्ष के दौरान 25 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। हृदय रोग विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक चिकित्सा तकनीक, बेहतर डायग्नोसिस और आम लोगों में बढ़ती जागरूकता ने गंभीर मरीजों के लिए जीवन की नई राहें खोल दी हैं।

🫀 एओर्टिक स्टेनोसिस: उम्र बढ़ने का भ्रम और छिपा हुआ खतरा

एओर्टिक स्टेनोसिस एक बेहद गंभीर हृदय रोग है, जो मुख्य रूप से 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को अपना शिकार बनाता है:

  • क्या होता है असर: इस बीमारी में हृदय की मुख्य एओर्टिक वाल्व संकरी (सिकुड़) हो जाती है, जिससे पूरे शरीर में शुद्ध रक्त का प्रवाह गंभीर रूप से प्रभावित होता है।

  • प्रमुख लक्षण: सांस फूलना, सीने में तेज दर्द, अत्यधिक थकान और अचानक चक्कर आना इसके मुख्य लक्षण हैं। अक्सर लोग इन्हें ‘उम्र बढ़ने की सामान्य समस्या’ समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में जानलेवा साबित होता है।

🔬 TAVR तकनीक: कम जोखिम, तेज रिकवरी और बेहतर जिंदगी

एस. एल. रहेजा अस्पताल के इंटरवेंशनल एवं स्ट्रक्चरल कार्डियोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. हरेश मेहता ने इस पर अपने विचार साझा करते हुए बताया:

“पिछले कुछ वर्षों में मुंबई में मिनिमली इनवेसिव कार्डियक थेरेपी का चलन तेजी से बढ़ा है। TAVR तकनीक ने बुजुर्ग और गंभीर मरीजों को एक बेहद कम जोखिम वाला बेहतरीन विकल्प दिया है, जिससे मरीज बहुत तेजी से ठीक होता है और उसकी जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life) में सुधार आता है।”

पहले जहां TAVR का इस्तेमाल केवल अत्यधिक उच्च जोखिम वाले मरीजों के लिए किया जाता था, वहीं अब नई गाइडलाइंस के बाद मध्यम और कम जोखिम वाले दिल के मरीजों के लिए भी इसका उपयोग धड़ल्ले से बढ़ रहा है।

🏥 2 से 3 दिनों में अस्पताल से छुट्टी; अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में भी मुहर

हाल ही में प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय मेडिकल अध्ययन में TAVR तकनीक के चमत्कारी और बेहद सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं:

  • 7 साल की रिसर्च: लगभग 1,000 मरीजों पर लगातार सात वर्षों तक किए गए एक बड़े अध्ययन में पाया गया कि TAVR और पारंपरिक ओपन हार्ट (ओपन चेस्ट) सर्जरी के परिणाम लगभग एक समान और बेहद सुरक्षित हैं।

  • तुरंत सामान्य जीवन: पारंपरिक सर्जरी में जहाँ महीनों का समय लगता है, वहीं TAVR तकनीक से इलाज कराने वाले अधिकांश मरीज महज दो से तीन दिनों के भीतर अस्पताल से डिस्चार्ज होकर अपने घर लौट जाते हैं और सामान्य जीवन जीने लगते हैं।

अत्याधुनिक इमेजिंग तकनीक, हाइब्रिड कैथ लैब और डॉक्टरों की मल्टीडिसिप्लिनरी टीमों के दम पर मुंबई आने वाले वर्षों में केवल भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सबसे बड़ा कार्डियक केयर हब बनने की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ा रहा है।


मुंबई (अनिल बेदाग):

(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)

 एडिटर (Allrights Magazine)


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