MP राज्यसभा चुनाव: SC में बड़ी बहस

नामांकन रद्द होने पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन, सिंघवी और रोहतगी के बीच तीखी बहस!

नई दिल्ली:

मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में सियासी और कानूनी सरगर्मी बढ़ गई है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र चुनाव अधिकारी (RO) द्वारा खारिज किए जाने के बाद, कांग्रेस ने इस फैसले को सीधे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए शीर्ष अदालत में इस पर तीखी बहस शुरू हो चुकी है।

⚖️ कांग्रेस की दलील: “जब आरोप ही तय नहीं, तो नामांकन कैसे रद्द हुआ?”

मीनाक्षी नटराजन की तरफ से देश के दिग्गज वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने पैरवी की। सिंघवी ने अदालत के सामने दलील देते हुए चुनाव अधिकारी के फैसले पर गंभीर सवाल उठाए:

  • आरोप तय होना जरूरी: सिंघवी ने कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (RoP Act) के तहत किसी का नामांकन खारिज करने के लिए ‘आरोपों का तय होना’ एक अनिवार्य शर्त है।

  • कोई चार्जशीट नहीं: संबंधित मामले में मीनाक्षी नटराजन पर अभी तक कोई आरोप तय (Charges Frame) नहीं हुए हैं। ऐसे में नामांकन रद्द करने का फैसला पूरी तरह गैर-कानूनी है।

कोर्ट का कड़ा सवाल: सिंघवी की दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट ने उनसे पूछा— “क्या आपके पास ऐसा कोई पुराना फैसला या उदाहरण है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर (RO) का आदेश रद्द कर नामांकन स्वीकार किया हो?” इस पर सिंघवी ने जवाब दिया कि जब ऐसे अनोखे तथ्य सामने आते हैं, तो कोर्ट को नया कानून लागू करना ही होता है।

🚫 बीजेपी का पलटवार: “सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर ही नहीं की जा सकती”

दूसरी तरफ, बीजेपी उम्मीदवार का पक्ष रख रहे देश के पूर्व अटॉर्नी जनरल और सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने इस याचिका की वैधानिकता पर ही बड़ा हमला बोला। उन्होंने कोर्ट के सामने दो बेहद कड़े तर्क रखे:

  • आर्टिकल 32 का हवाला: रोहतगी ने कहा कि किसी का नॉमिनेशन पेपर खारिज होने से उसके मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) का हनन नहीं होता। इसलिए संविधान के अनुच्छेद 32 (रिट क्षेत्राधिकार) के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट नहीं आया जा सकता।

  • चुनावी प्रक्रिया में नो दखल: संविधान का अनुच्छेद 329 साफ कहता है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान अनुच्छेद 32 या 226 (हाईकोर्ट) के जरिए न्यायिक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। यह मामला केवल चुनावी ट्रिब्यूनल के पास ही जाना चाहिए, चाहे फैसला सही हो या गलत।

💻 तकनीकी खराबी के कारण रुकी बहस

सुनवाई के दौरान एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब वीसी (Virtual Conference) मोड के जरिए अपनी दलीलें पेश कर रहे वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी की आवाज अचानक रुक गई। तकनीकी खराबी (Technical Glitch) के कारण उनकी बहस बीच में ही बाधित हो गई, जिसके बाद कोर्ट ने तकनीकी सुधार के निर्देश दिए। फिलहाल इस मामले पर कोर्ट की नजर बनी हुई है।


(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)

 एडिटर (Allrights Magazine)


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