मिजोरम महिंद्रा फाइनेंस घोटाला: ED की चार्जशीट
मिजोरम: महिंद्रा फाइनेंस में 146 करोड़ का फर्जीवाड़ा, ईडी ने मुख्य आरोपी सहित 14 के खिलाफ दायर की चार्जशीट
(आइजोल ब्यूरो)
आइजोल: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के आइजोल सब-जोनल कार्यालय ने महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (MMFSL) में हुए करोड़ों रुपये के वाहन ऋण घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने इस धोखाधड़ी के मास्टरमाइंड जाकिर हुसैन और 13 अन्य आरोपियों के खिलाफ आइजोल की विशेष अदालत में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) दर्ज की है।
धोखाधड़ी का मास्टरमाइंड और कार्यप्रणाली
जांच में सामने आया है कि जाकिर हुसैन, जो MMFSL की आइजोल शाखा में एरिया बिजनेस मैनेजर था, इस पूरे सुनियोजित घोटाले का मुख्य सूत्रधार था।
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फर्जी प्रोफाइल: हुसैन ने कार डीलरों और अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर आधार, वोटर आईडी और आय प्रमाण पत्र जैसे जाली दस्तावेजों का उपयोग कर सैकड़ों फर्जी ग्राहक प्रोफाइल बनाए।
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बिना वाहन बिक्री के ऋण: बिना किसी वास्तविक वाहन की बिक्री के ही गैर-मौजूद ग्राहकों के नाम पर करोड़ों रुपये का वाहन ऋण वितरित करवा दिया गया।
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ऋण की संख्या: मुख्य आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने 600 से अधिक फर्जी लोन फाइलें संभालीं, जबकि अन्य सह-आरोपी प्रलय दास के माध्यम से लगभग 1,200 अतिरिक्त फर्जी फाइलें तैयार की गईं।
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डीलरों की भूमिका: MMFSL द्वारा चार कार डीलरों—मैसर्स सीके कार्स, मैसर्स राफेल निसान (हाइलैंड), मैसर्स एडू मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड और मैसर्स नेशनल बिजनेस एंटरप्राइजेज—को फर्जी खातों के जरिए लगभग 146.67 करोड़ रुपये वितरित किए गए।
धन शोधन (Money Laundering) का खेल
घोटाले की राशि को छिपाने के लिए आरोपियों ने बेहद चालाकी से काम किया:
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फर्जी बैंक खाते: हुसैन ने मिजोरम रूरल बैंक में MMFSL से मिलते-जुलते नामों (जैसे ‘महिंद्रा फाइनेंस लिमिटेड’) से फर्जी खाते खुलवाए।
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फंड डायवर्जन: डीलरों के खातों में जमा ऋण राशि का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 87.13 करोड़ रुपये) इन फर्जी खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।
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साक्ष्य मिटाना: फर्जी फाइलों के टेली-वेरिफिकेशन के लिए अस्थायी सिम कार्ड का उपयोग किया गया, जिन्हें बाद में सबूत नष्ट करने के लिए तोड़ दिया गया।
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ईएमआई का दिखावा: घोटाले को लंबे समय तक चलाने के लिए लगभग 71.34 करोड़ रुपये को ईएमआई पुनर्भुगतान के रूप में वापस MMFSL को भेजा गया, ताकि फर्जी खाते असली लगें।
जब्ती और संपत्तियों की कुर्की
ईडी ने अब तक इस मामले में व्यापक स्तर पर संपत्तियों की पहचान और जब्ती की है:
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कुल गबन: इस घोटाले के माध्यम से कुल 75.33 करोड़ रुपये की ‘अपराध की कमाई’ को ठिकाने लगाया गया।
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अचल संपत्तियां: जाकिर हुसैन ने इन पैसों से मिजोरम (आइजोल) और असम (तेजपुर, नगांव, सिलचर, बालीपारा) में अपनी पत्नी और रिश्तेदारों के नाम पर बेनामी संपत्तियां खरीदीं।
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अन्य निवेश: लगभग 2.06 करोड़ रुपये की जीवन बीमा पॉलिसियां और हाई-वैल्यू वाहन (किया सेल्टोस और हुंडई अल्काजार) खरीदे गए।
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ईडी की कार्रवाई: ईडी ने अब तक तीन आदेशों के जरिए लगभग 35.62 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को कुर्क किया है।
मिजोरम पुलिस द्वारा दर्ज की गई दो एफआईआर के आधार पर शुरू हुई इस जांच में ईडी अभी भी आगे की कड़ियों को जोड़ रही है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

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