बरेली में वाटर वॉशिंग सेंटरों के खिलाफ ज्ञापन
बरेली: बढ़ते जल संकट के बीच वाटर वॉशिंग सेंटरों पर कार्रवाई की मांग; ‘स्वास्थ्य सेतु चैरिटेबल ट्रस्ट’ ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
(बरेली): शहर में लगातार गहराते जल संकट और पेयजल की किल्लत के बीच पानी की हो रही भीषण बर्बादी को लेकर सामाजिक संस्था “स्वास्थ्य सेतु चैरिटेबल ट्रस्ट” ने गहरा आक्रोश जताया है। संस्था के पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से बरेली के जिलाधिकारी (डीएम) को एक ज्ञापन सौंपकर शहर भर में धड़ल्ले से संचालित हो रहे कार व बाइक वॉशिंग सेंटरों पर तत्काल सख्त प्रशासनिक कार्रवाई करने की मांग की है।
भीषण गर्मी में एक तरफ प्यास, दूसरी तरफ पानी की अंधाधुंध बर्बादी
जिलाधिकारी कार्यालय में ज्ञापन सौंपते हुए संस्था के पदाधिकारियों ने वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस चिलाचिलाती गर्मी के मौसम में जहाँ आम जनता और निर्धन परिवारों को पीने के साफ पानी के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं शहर के कोने-कोने में व्यावसायिक रूप से चल रहे कार वॉशिंग सेंटर प्रतिदिन हजारों-लाखों लीटर शुद्ध भूमिगत जल (Groundwater) को नालियों में व्यर्थ बहा रहे हैं।
एक गाड़ी की धुलाई में बह रहा है 300 लीटर तक पानी
ज्ञापन में पानी की बर्बादी के चौंकाने वाले आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया गया कि:
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एक सामान्य चार पहिया वाहन (कार) की धुलाई में औसतन 150 से 300 लीटर तक कीमती पानी खर्च कर दिया जाता है।
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बरेली शहर और उसके आसपास के क्षेत्रों में ऐसे सैकड़ों सेंटर अवैध या बिना नियमों के चल रहे हैं, जो प्रतिदिन लाखों लीटर पानी बर्बाद कर रहे हैं।
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संस्था ने इसे जल संरक्षण (Water Conservation), पर्यावरण हित और आने वाली भावी पीढ़ियों के भविष्य के लिए एक बेहद गंभीर और चिंताजनक विषय बताया है।
ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से की गईं ये मुख्य मांगें:
स्वास्थ्य सेतु चैरिटेबल ट्रस्ट ने शहर को सूखे के संकट से बचाने के लिए जिलाधिकारी के समक्ष निम्नलिखित चार प्रमुख मांगें रखी हैं:
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सघन जांच अभियान: बरेली शहर में संचालित हो रहे सभी छोटे-बड़े कार वॉशिंग सेंटरों की वैधता और वहां हो रहे पानी के स्रोत की गहन जांच कराई जाए।
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लापरवाहों पर जुर्माना: भूजल का अत्यधिक दोहन करने और सरकारी नियमों का सरेआम उल्लंघन करने वाले सेंटरों को तत्काल सील कर उन पर भारी जुर्माना लगाया जाए।
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रीसाइक्लिंग सिस्टम अनिवार्य हो: प्रशासन केवल उन्हीं सेंटरों को संचालन की अनुमति दे, जहाँ पानी को दोबारा इस्तेमाल करने के लिए ‘वॉटर रीसाइक्लिंग और प्यूरिफिकेशन सिस्टम’ (Water Recycling System) अनिवार्य रूप से लगा हो।
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जन जागरूकता अभियान: शहर की जनता और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को जल संरक्षण के महत्व के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाए।
इस दौरान संस्था के कई वरिष्ठ पदाधिकारी, पर्यावरणविद और स्थानीय समाजसेवी मुख्य रूप से मौजूद रहे। जिलाधिकारी कार्यालय ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए संस्था को आश्वस्त किया है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को जल्द ही जांच और उचित कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे।
बरेली से रोहिताश कुमार
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,सीनियर एडिटर
(Allrights Magazine)

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