जौनपुर को मिली बड़ी सौगात, इंदिरा गांधी स्टेडियम में वर्ल्ड-क्लास सिंथेटिक ट्रैक तैयार


पूर्वांचल के खिलाड़ियों को मिलेगी राष्ट्रीय स्तर की सुविधा, जौनपुर में तैयार हुआ अत्याधुनिक सिंथेटिक ट्रैक

पूर्वांचल की खेल प्रतिभाओं के लिए एक ऐतिहासिक खबर है। अब जौनपुर और आस-पास के धावकों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। जौनपुर के इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स स्टेडियम में एक अत्याधुनिक सिंथेटिक रनिंग ट्रैक बनकर पूरी तरह तैयार हो गया है, जो पूर्वांचल के खिलाड़ियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

वाराणसी के बाद जौनपुर पूर्वांचल का दूसरा ऐसा जिला बन गया है, जहां खिलाड़ियों को यह विश्व स्तरीय सुविधा मिलेगी।

प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं

  • विशाल और आधुनिक: यह ट्रैक 400 मीटर लंबा और 8-लेन का है, जिसे पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय मानकों (International Standards) के अनुसार तैयार किया गया है।

  • लागत: इस शानदार प्रोजेक्ट के निर्माण में लगभग 8.65 से 9 करोड़ रुपये की लागत आई है।

  • अंतरराष्ट्रीय मान्यता: इस सिंथेटिक ट्रैक को ‘वर्ल्ड एथलेटिक्स’ (World Athletics) द्वारा प्रमाणित किया गया है, जो इसकी बेहतरीन गुणवत्ता की पुष्टि करता है।

  • सुविधाएं: ट्रैक पर सिंथेटिक लेयरिंग, बेहतरीन ड्रेनेज सिस्टम (ताकि बारिश का पानी न रुके) और लेन मार्किंग का काम पूरा हो चुका है।

खिलाड़ियों के लिए यह कैसे बनेगा ‘गेम-चेंजर’?

  • बारह महीने अभ्यास: पहले बारिश या खराब मौसम के कारण मिट्टी के मैदान पर अभ्यास करना मुश्किल होता था। अब इस ट्रैक के जरिए खिलाड़ी साल के 365 दिन बिना किसी रुकावट के पसीना बहा सकेंगे।

  • चोट का खतरा कम: सिंथेटिक सतह धावकों को बेहतरीन ग्रिप और कुशनिंग देती है। इससे दौड़ते समय घुटनों और टखनों पर दबाव कम पड़ता है और चोट (Injury) लगने की संभावना बेहद कम हो जाती है।

  • स्थानीय प्रतिभाओं का विकास: जो खिलाड़ी सुविधाओं के अभाव में खेल छोड़ देते थे या महंगे प्रशिक्षण के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करते थे, वे अब अपने ही शहर में रहकर अपने सपनों को नई उड़ान दे सकेंगे।

भविष्य की संभावनाएं

इस विश्व स्तरीय ट्रैक के शुरू होने से जौनपुर में राज्य और राष्ट्रीय स्तर की एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं (State and National Level Athletics Meets) के आयोजन का रास्ता साफ हो गया है। इससे न सिर्फ नए खिलाड़ियों को अनुभवी एथलीट्स से बहुत कुछ सीखने का मौका मिलेगा, बल्कि पूरे पूर्वांचल में खेल संस्कृति को एक नई दिशा और पहचान मिलेगी।


(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)

 (एडिटर (Allrights Magazine)

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