जन्माष्टमी: धर्म व कर्तव्य का मार्ग दिखाता है गीता दर्शन
नंद के घर आनंद भयो…’: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर देशवासियों को शुभकामनाएं, जीवन-संतुलन और कर्तव्य का मार्ग दिखाता है गीता का दर्शन
नई दिल्ली/लखनऊ: पावन पर्व ‘श्रीकृष्ण जन्माष्टमी’ के अवसर पर देश भर में अपार श्रद्धा, उल्लास और भक्ति का माहौल है। “नंद के घर आनंद भयो जय हो बृजपाल की, हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की” के जयघोषों के बीच देशवासियों को जन्माष्टमी की मंगलकामनाएं प्रेषित की गई हैं। यह पावन पर्व भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उनके अनगिनत भक्तों के असीम प्रेम और निष्ठा का प्रतीक है।
माता यशोदा का वात्सल्य और कन्हैया की मनमोहक बाल-लीलाएं बालरूप में कन्हैया की मनमोहक लीलाएं सदियों से जन-मन को आनंदित करती रही हैं। बच्चों को प्रेम और दुलार से ‘कान्हा’ पुकारते ही हर हृदय प्रसन्नता से भर जाता है। भारतीय संस्कृति में प्रत्येक मां अपने बच्चे में कन्हैया का स्वरूप देखती है और उस पर माता यशोदा सा अगाध स्नेह न्योछावर करती है। कन्हैया का बालरूप वात्सल्य और वात्सल्य भाव की चरम अभिव्यक्ति है।
कठिन परिस्थितियों में सत्य और धर्म का मार्ग दिखाता है गीता का ज्ञान योगेश्वर श्रीकृष्ण ने केवल लीलाएं ही नहीं रचीं, बल्कि जीवन के कठोर यथार्थ को भी दर्शाया। महाभारत के रणक्षेत्र में अर्जुन को दिया गया श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश भारत के दर्शन की आत्मा है।
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जीवन दर्शन: कर्तव्य, नीति, न्याय, विवेक, साहस और जीवन-संतुलन का यह महान दर्शन सदियों से मानव जीवन के लिए मार्गदर्शक बना हुआ है।
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धर्म की विजय: भगवान श्रीकृष्ण सिखाते हैं कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, जो व्यक्ति सत्य और धर्म के मार्ग पर अडिग रहता है, अंततः विजय उसी की होती है।
राष्ट्र और समाज के कल्याण की प्रार्थना जन्माष्टमी के इस पावन अवसर पर प्रार्थना की गई है कि प्रभु श्रीकृष्ण की कृपा से हर घर में सुख-शांति, मन में विश्वास और जीवन में नई ऊर्जा का संचार हो। साथ ही हमारा राष्ट्र और समाज सत्य, न्याय तथा मानवता के पथ पर निरंतर आगे बढ़ता रहे।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

