जग्गी मर्डर: अमित जोगी को राहत नहीं
रामावतार जग्गी हत्याकांड: अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, 23 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। सोमवार (20 अप्रैल 2026) को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने अमित जोगी की सजा और समर्पण (Surrender) से छूट वाली याचिका पर तत्काल आदेश देने से इनकार कर दिया।
23 अप्रैल को होगी ‘संयुक्त’ सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दो अलग-अलग याचिकाओं को एक साथ टैग कर दिया है:
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लीव टू अपील: सीबीआई की अपील की अनुमति देने के 25 मार्च 2026 के आदेश के खिलाफ याचिका।
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सजा के खिलाफ अपील: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा 2 अप्रैल 2026 को सुनाई गई उम्रकैद की सजा के खिलाफ वैधानिक अपील।
अदालत अब इन दोनों ही मामलों पर 23 अप्रैल 2026 को एक साथ सुनवाई करेगी।
क्या है पूरा मामला?
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हत्याकांड: 4 जून 2003 को रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
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निचली अदालत का फैसला: साल 2007 में रायपुर की विशेष अदालत ने अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था, जबकि अन्य 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
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हाईकोर्ट का यू-टर्न: सीबीआई की अपील पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल 2026 को अमित जोगी को बरी करने के फैसले को पलट दिया और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने उन्हें तीन हफ्ते के भीतर समर्पण करने का निर्देश दिया था।
अमित जोगी का पक्ष
अमित जोगी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी और विवेक तन्खा जैसे दिग्गज वकील पेश हुए। जोगी का तर्क है कि हाईकोर्ट ने उनका पक्ष सुने बिना ही महज 40 मिनट में फैसला सुना दिया, जो उनके साथ अन्याय है। उन्होंने अपनी गिरफ्तारी और सरेंडर पर रोक लगाने की मांग की है।
सुनवाई के बाद अमित जोगी ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मुझे न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास है।” अब सबकी निगाहें 23 अप्रैल को होने वाली संयुक्त सुनवाई पर टिकी हैं, जो अमित जोगी का भविष्य तय करेगी।
- गोपाल चन्द्र अग्रवाल, सीनियर एडिटर (Allrights Magazin)

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