क्या विज्ञापनों में ही नंबर-1 है दिल्ली?
दिल्ली या ‘कूड़ा नगरी’? बदहाल राजधानी
(नई दिल्ली: ब्यूरो रिपोर्ट) देश की राजधानी दिल्ली आज अपनी चमक खोती जा रही है। कहने को तो यह एक ‘ग्लोबल सिटी’ है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। लक्ष्मी नगर (B28, सुभाष चौक) से सामने आईं ताज़ा तस्वीरें महज़ एक इलाके की कहानी नहीं, बल्कि पूरी दिल्ली के प्रशासनिक फेलियर (System Failure) का जीता-जागता सबूत हैं।

लक्ष्मी नगर के सुभाष चौक पर जो मंजर दिख रहा है, वही हाल आज दिल्ली के अधिकतर रिहायशी और कमर्शियल इलाकों का है।
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कूड़े का साम्राज्य: दिल्ली नगर निगम (MCD) के दावों के बावजूद, सड़कों के किनारे कचरे के ऊंचे ढेर लगे हैं। लक्ष्मी नगर की गंदगी यह बताने के लिए काफी है कि एमसीडी का सफाई तंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है।

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अतिक्रमण की गिरफ्त में सड़कें: दिल्ली की सड़कों पर चलना अब किसी चुनौती से कम नहीं। लक्ष्मी नगर की तरह पूरी दिल्ली में मुख्य रास्तों पर अवैध पार्किंग और ठेलों का कब्ज़ा है। लोग अपनी गाड़ियाँ और खाने-पीने की दुकानें सड़कों पर लगा देते हैं, जिससे घंटों जाम लगा रहता है।

प्रशासनिक तालमेल का अभाव
दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम (MCD) के बीच की खींचतान का खामियाजा आम जनता भुगत रही है। प्रशासन की नाक के नीचे अवैध अतिक्रमण फल-फूल रहा है।
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क्या दिल्ली सरकार सिर्फ विज्ञापनों में नंबर-1 है?
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क्या एमसीडी का काम सिर्फ टैक्स वसूलना रह गया है?

जनता की आवाज़
लक्ष्मी नगर बी-2 से लेकर पूरी दिल्ली की जनता अब पूछ रही है कि उन्हें इस नारकीय जीवन से मुक्ति कब मिलेगी? न चलने के लिए फुटपाथ बचे हैं और न ही सांस लेने के लिए साफ हवा। गंदगी से फैलती बीमारियां और ट्रैफिक जाम ने दिल्ली वालों का जीना मुहाल कर दिया है।

हमारा सवाल: अगर देश की राजधानी का यह हाल है, तो देश के अन्य हिस्सों से हम क्या उम्मीद करें? लक्ष्मी नगर के इन वीडियो और फोटो ने दिल्ली की व्यवस्था को बेनकाब कर दिया है। अब देखना यह है कि दिल्ली सरकार और एमसीडी इस पर कोई ठोस कार्रवाई करती है या फिर जनता को इसी बदहाली के भरोसे छोड़ दिया जाएगा।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazin)

