भारत-रोमानिया आर्थिक संबंध होंगे मजबूत

भारत-रोमानिया के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुखारेस्ट में व्यापार मंच को किया संबोधित, यूरोपीय बाजार का ‘प्रवेश द्वार’ बताया


रिपोर्ट: सोनू कुमार (पत्रकार)

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भारत और रोमानिया के बीच आर्थिक, व्यापारिक और निवेश संबंधों को नए पंख देने और उन्हें विस्तार देने का पुरजोर आह्वान किया है। रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट में आयोजित ‘भारत-रोमानिया व्यापार मंच’ (India-Romania Business Forum) को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों के बीच गहन वाणिज्यिक सहयोग की अपार और असीम संभावनाएं मौजूद हैं।

राष्ट्रपति मुर्मु ने स्पष्ट किया कि रोमानिया की रणनीतिक स्थिति, वहां का कुशल कार्यबल और यूरोपीय संघ (EU) के साथ उसका मजबूत जुड़ाव, इसे भारत के लिए एक अत्यंत भरोसेमंद भागीदार तथा व्यापक यूरोपीय बाजार का एक आदर्श ‘प्रवेश द्वार’ (Gateway) बनाता है।

भारत-यूरोपीय संघ FTA: व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मिलेगी नई मजबूती

राष्ट्रपति ने प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (India-EU Free Trade Agreement) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक समझौता व्यापार, द्विपक्षीय निवेश और मजबूत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply Chains) को बढ़ावा देकर आर्थिक संबंधों को एक नया आयाम प्रदान करेगा।

इन 14 प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की अपार संभावनाएं

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन में उन प्रमुख रणनीतिक क्षेत्रों को रेखांकित किया जहाँ दोनों देश मिलकर काम कर सकते हैं:

  • तकनीक एवं रक्षा: रक्षा विनिर्माण (Defense Manufacturing), सूचना प्रौद्योगिकी (IT), डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) और साइबर सुरक्षा।

  • ऊर्जा एवं पर्यावरण: नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy), ग्रीन हाइड्रोजन और परमाणु ऊर्जा।

  • स्वास्थ्य एवं अवसंरचना: फार्मास्यूटिकल्स, स्वास्थ्य सेवा, परिवहन, रसद (Logistics), कृषि और खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing)।

उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, सरकार के निवेशक-अनुकूल सुधार और ‘विकसित भारत 2047’ की दूरदर्शी परिकल्पना वैश्विक साझेदारी व निवेश के लिए अभूतपूर्व अवसर प्रदान कर रही है।

संस्थागत तंत्र और व्यापारिक संवाद पर बल

संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने द्विपक्षीय आर्थिक तंत्रों जैसे— संयुक्त आर्थिक आयोग (Joint Economic Commission), ऊर्जा पर संयुक्त कार्य समूह और संयुक्त रक्षा सहयोग समिति की महत्वपूर्ण भूमिका को सराहा। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के व्यापारिक दिग्गजों के बीच हो रहे इस संवाद से नए निवेश, मजबूत साझेदारियां और स्थायी व्यापारिक संबंध स्थापित होंगे।


सीनियर एडिटर गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

ALL rights magazine (डिजिटल न्यूज़ नेटवर्क)


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