ठग कन्हैया गुलाटी की खुलेगी हिस्ट्रीशीट
कन्हैया गुलाटी का ‘ठगी साम्राज्य’: 5 राज्यों में 40 मुकदमे दर्ज, अब गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क होगी संपत्तियां
बरेली। करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के आरोपी कन्हैया गुलाटी और उसके गैंग पर पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ठगी के जाल में न केवल आम जनता, बल्कि शहर के रसूखदार डॉक्टर और अस्पताल संचालक भी फंसते जा रहे हैं। ताज़ा मामले में एक अस्पताल मालिक से 13 लाख रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है, जिसके बाद पुलिस अब इस पूरे गिरोह की हिस्ट्रीशीट खोलने और संपत्तियों को जब्त करने की तैयारी में है।
5 राज्यों में फैला ठगी का नेटवर्क, 40 FIR दर्ज
पुलिस जांच में कन्हैया गुलाटी के अपराधों का एक लंबा चिट्ठा सामने आया है। डीआईजी अजय कुमार साहनी के अनुसार, गुलाटी के खिलाफ अब तक कुल 40 प्राथमिकी (FIR) दर्ज हो चुकी हैं। यह नेटवर्क केवल यूपी तक सीमित नहीं था:
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उत्तर प्रदेश: बरेली (34), शाहजहांपुर (2), अयोध्या (1), कासगंज (1)
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बिहार: बेरोह (1)
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झारखंड: रांची (1)
डीआईजी ने स्पष्ट किया है कि गुलाटी और उसके साथियों (मुहम्मद यासीन और आशीष महाजन) के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही इनकी अवैध रूप से कमाई गई संपत्तियों के जब्तीकरण की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
अस्पताल संचालक भी बने शिकार: 13 लाख की चपत
ठगी का नया मामला किला थाना क्षेत्र से सामने आया है। वीआर अस्पताल के संचालक मनोज कुमार गुप्ता ने पुलिस को बताया कि करीब डेढ़ साल पहले योगेंद्र गंगवार और यतेंद्र गंगवार ने उन्हें कंपनी की लुभावनी स्कीमों के झांसे में लिया।
शुरुआत में विश्वास जीतने के लिए आरोपियों ने कुछ पैसे वापस किए, जिससे उत्साहित होकर मनोज गुप्ता और उनकी पत्नी ने कुल 30 लाख रुपये से अधिक का निवेश कर दिया।
‘अफवाह है मालिक की गिरफ्तारी’ – झांसा देकर लूटे और पैसे
जब कन्हैया गुलाटी के फरार होने की खबरें उड़ीं, तो पीड़ित मनोज गुप्ता ने आरोपियों से संपर्क किया। आरोपियों ने इसे महज एक ‘अफवाह’ बताया और कहा कि मालिक मीटिंगों में व्यस्त हैं। इस झांसे में आकर पीड़ित ने 10 लाख रुपये और निवेश कर दिए।
अंततः, जब निवेश डूबा नजर आया तो मनोज गुप्ता ने कन्हैया गुलाटी, योगेंद्र, यतेंद्र, गोपाल गुलाटी और राधिका गुलाटी समेत अन्य के खिलाफ किला थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
मुख्य बिंदु जो इस खबर को खास बनाते हैं:
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गैंगस्टर एक्ट: पुलिस अब अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़ने की तैयारी में है।
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सावधान रहें: लुभावनी स्कीम और भारी रिटर्न के वादों से बचें।
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