सूरजकुंड दिवाली मेला 2026 का भव्य शुभारंभ: मुख्यमंत्री नायब सैनी बोले—’स्वदेशी अपनाकर मजबूत करें वोकल फॉर लोकल का संकल्प, कारीगरों की आजीविका को दें संबल’
“सूरजकुंड दिवाली मेला 2026: स्वदेशी उत्पादों और स्थानीय कारीगरों को मिल रहा नया बाजार; सीएम नायब सैनी ने की ‘वोकल फॉर लोकल’ अपनाने की अपील”
विशेष सांस्कृतिक एवं आर्थिक विकास रिपोर्ट (ऑल RIGHTs मैगजीन)
चंडीगढ़ / फरीदाबाद: दीवाली के पावन पर्व को और अधिक खास बनाने तथा पारंपरिक कलाओं और शिल्पकारों को एक सशक्त मंच प्रदान करने के उद्देश्य से हरियाणा के फरीदाबाद स्थित प्रसिद्ध सूरजकुंड परिसर में सूरजकुंड दिवाली मेले का भव्य आयोजन किया जा रहा है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने इस मेले के उद्घाटन अवसर पर शिरकत करते हुए प्रदेश और देशवासियों से स्थानीय उत्पादों को अपनाने और देश के मेहनतकश कारीगरों को खुलकर प्रोत्साहित करने का आह्वान किया। 23 से 26 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस चार दिवसीय मेले में भारतीय हस्तशिल्प, समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक कलाओं और देश के विभिन्न अंचलों के लजीज खानपान की अद्भुत छटा देखने को मिल रही है।
1. कारीगरों और शिल्पकारों के लिए सीधा बाजार
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उचित परिश्रम का मूल्य: इस अवसर पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सूरजकुंड दिवाली मेला स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और शिल्पकारों के उत्पादों को बिचौलियों के बिना सीधे ग्राहकों तक पहुँचाने का एक बेहद सार्थक और प्रभावी प्रयास है, जिससे उन्हें उनके उत्पादों का उचित और वाजिब मूल्य मिल पा रहा है।
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‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ का संकल्प: त्योहारों के इस पावन सीजन में स्वदेशी उत्पादों को अपनाना न केवल हमारी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को सहेजता है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के संकल्प को भी धरातल पर मजबूत करता है। इससे छोटे कारीगरों और उनके परिवारों की आजीविका को बड़ा संबल मिलता है।
2. मेले के मुख्य आकर्षण
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हस्तशिल्प और कला: देश के अलग-अलग कोनों से आए हुनरमंद कारीगरों द्वारा निर्मित हाथ से बनी कलाकृतियां, मिट्टी के पारंपरिक दीये, सजावटी सामान और वस्त्र आगंतुकों के मुख्य आकर्षण का केंद्र हैं।
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लोक संस्कृति और खानपान: मेले में विभिन्न राज्यों की लोक कला, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल लोगों को भारत की विविधता में एकता का अहसास करा रहे हैं।
3. ‘ऑल RIGHTs मैगजीन’ का दृष्टिकोण: स्वदेशी संस्कृति और आर्थिक स्वावलंबन
त्योहारों का असली आनंद तब और बढ़ जाता है जब हमारी खुशियों में समाज के उन छोटे कारीगरों और हुनरमंद परिवारों की मेहनत भी शामिल होती है जो रात-दिन दीये और हस्तशिल्प तैयार करते हैं। सूरजकुंड मेला जैसे आयोजन हमारे पारंपरिक उद्योगों को नई ऊर्जा और पहचान देते हैं।
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क्या आप हरियाणा सरकार द्वारा स्थानीय कारीगरों और एमएसएमई (MSME) सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही अन्य योजनाओं की समीक्षा पढ़ना चाहते हैं?
