घट रहे हैं ‘कूड़े के पहाड़’: राहत में दिल्लीवासी

“दिल्ली की पहचान से हटता बदनुमा दाग”: ‘कूड़े के पहाड़’ घटने पर क्या कह रहे हैं दिल्लीवाले

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के प्रवेश द्वारों पर दशकों से खड़े गाजीपुर, भलस्वा और ओखला के ‘कूड़े के पहाड़’ (Legacy Landfills) अब तेजी से ढह रहे हैं। एमसीडी (MCD), दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार की साझा पहलों और 24 घंटे चल रही ‘बायो-माइनिंग’ (Bio-mining) तकनीक के कारण इन लैंडफिल साइटों की ऊंचाई में उल्लेखनीय कमी आई है।

दशकों पुराने इस कचरे के पहाड़ के समतल होने और जमीन के फिर से हरे-भरे होने की प्रक्रिया को देखकर दिल्ली के आम नागरिकों के बीच खुशी और राहत का माहौल है।

तस्वीर बदलती देख दिल्लीवासियों की प्रतिक्रियाएं

लैंडफिल साइटों के आसपास रहने वाले स्थानीय निवासियों, यात्रियों और युवाओं में इस बदलाव को लेकर अलग-अलग अनुभव हैं:

  • आसपास के निवासियों को राहत: भलस्वा और गाजीपुर के समीप रहने वाले लोगों का कहना है कि सालों से जो बदबू, जहरीला धुआं और मक्खी-मच्छरों का आतंक उनका जीना दूभर किए हुए था, उसमें अब काफी कमी आई है। स्थानीय बुजुर्गों का कहना है— “हम मान चुके थे कि ये पहाड़ कभी नहीं हटेंगे, लेकिन अब पहली बार खुली धूप और साफ हवा की उम्मीद जगी है।”

  • दिल्ली में प्रवेश करने वाले यात्रियों की बात: एनएच-24 (NH-24) और जीटी करनाल रोड से रोजाना गुजरने वाले यात्रियों का कहना है कि दिल्ली में दाखिल होते ही जो विशालकाय कचरे का ढेर स्वागत करता था, उसकी ऊंचाई अब जमीन से साफ घटती हुई दिख रही है। यह शहर की छवि के लिए एक बड़ा बदलाव है।

  • युवाओं और पर्यावरण प्रेमियों का नजरिया: पर्यावरण के प्रति जागरूक युवाओं का मानना है कि बायो-माइनिंग और रिसाइकलिंग के जरिए जिस तरह से जमीन को दोबारा इस्तेमाल के लायक बनाया जा रहा है, वह स्वच्छ भारत की दिशा में दिल्ली का सबसे बड़ा कदम है।

वैज्ञानिक प्रबंधन और रीक्लेमेशन: कैसे हो रहा है यह चमत्कार?

  • बायो-माइनिंग और ट्रॉमल मशीनें: लैंडफिल साइटों पर दिन-रात ट्रॉमल मशीनें चलाकर पुराने कचरे को छांटा जा रहा है। इसमें से प्लास्टिक और ज्वलनशील कचरे को सीमेंट फैक्ट्रियों तथा वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट्स (RDF) में भेजा जा रहा है।

  • हरियाली की वापसी: भलस्वा जैसे क्षेत्रों में खाली हुई एकड़ जमीन पर बांस के पौधे और ग्रीन बेल्ट विकसित की जा रही है, जिससे दूषित हवा को शुद्ध करने में मदद मिल रही है।

  • मिशन 2026-27: प्रशासन का लक्ष्य है कि तय समय-सीमा के भीतर दिल्ली को इन कचरे के पर्वतों से पूरी तरह आजादी दिलाई जाए।

‘ऑल राइट्स मैगजीन’ दिल्ली को स्वच्छ, सुंदर और कचरा-मुक्त बनाने के इस महाअभियान की सराहना करती है और उम्मीद करती है कि जल्द ही दिल्लीवासी पूरी तरह से साफ-सुथरी आबो-हवा में सांस ले सकेंगे।

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

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