क्या रैम क्लीनर ऐप्स फोन फास्ट करते हैं

क्या RAM Cleaner Apps सच में फोन को कर देते हैं फास्ट? ज्यादातर लोग नहीं जानते इसके पीछे की कड़वी हकीकत!

(नई दिल्ली): स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते समय जब भी फोन थोड़ा स्लो होने लगता है या हैंग होने लगता है, तो अधिकांश लोग तुरंत गूगल प्ले स्टोर (Google Play Store) या एप्पल ऐप स्टोर (Apple App Store) का रुख करते हैं। वहां आपको ‘RAM Cleaner’, ‘Phone Booster’ या ‘Cache Cleaner’ जैसे बड़े-बड़े दावों वाले सैकड़ों ऐप्स मिल जाएंगे। इन ऐप्स के विज्ञापन और प्रमोशन में यह दावा किया जाता है कि ये महज एक क्लिक में आपके डिवाइस की रैम (RAM) को पूरी तरह क्लियर करके फोन को रॉकेट की तरह फास्ट बना देंगे।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि सच में ऐसा होता है या यह सिर्फ एक छलावा है? आइए आज तकनीकी नजरिए से जानते हैं इन फोन बूस्टर ऐप्स की असली कड़वी हकीकत, जिसे जानकर आप भी दंग रह जाएंगे।

कैसे काम करते हैं ये रैम क्लीनर ऐप्स?

जब आप अपने फोन में किसी ‘RAM Cleaner’ या ‘Booster’ ऐप को रन करते हैं, तो वह आपके बैकग्राउंड में चल रहे सभी जरूरी और गैर-जरूरी ऐप्स को जबरन बंद (Force Stop) कर देता है। स्क्रीन पर एक शानदार एनिमेशन दिखाई देता है जो दिखाता है कि “1 GB RAM freed” (१ जीबी रैम खाली हो गई)। इसे देखकर यूजर को लगता है कि उसका फोन अब खाली और फास्ट हो गया है, लेकिन असल कहानी यहीं से शुरू होती है।

हकीकत: फास्ट करने की बजाय फोन को और स्लो कर देते हैं ये ऐप्स!

टेक एक्सपर्ट्स के अनुसार, एंड्रॉइड (Android) और आईओएस (iOS) का अपना एक आधुनिक ‘रैम मैनेजमेंट सिस्टम’ होता है। यह सिस्टम आज के समय में इतना एडवांस है कि इसे किसी बाहरी क्लीनर ऐप की बिल्कुल जरूरत नहीं होती। ये ऐप्स आपके फोन को फास्ट करने की बजाय निम्नलिखित तरीकों से नुकसान पहुंचाते हैं:

  • बैटरी की भारी खपत: जब यह क्लीनर ऐप बैकग्राउंड ऐप्स को जबरन बंद कर देता है, तो वे ऐप्स (जैसे WhatsApp, Instagram) अपनी सामान्य वर्किंग के लिए बैकग्राउंड में दोबारा रीस्टार्ट (स्वचालित रूप से शुरू) होते हैं। किसी ऐप को पूरी तरह बंद करके दोबारा खोलने में प्रोसेसर को दोगुनी ताकत लगानी पड़ती है, जिससे आपके फोन की बैटरी तेजी से खत्म होने लगती है।

  • प्रोसेसर पर बढ़ता है दबाव: बार-बार ऐप्स के बंद होने और खुद-ब-खुद रीस्टार्ट होने के कारण फोन के प्रोसेसर (CPU) पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे फोन स्मूथ चलने की बजाय और ज्यादा हैंग होने लगता है और डिवाइस गर्म (Overheating) भी हो जाता है।

  • डेटा और प्राइवेसी का खतरा: कई थर्ड-पार्टी रैम क्लीनर ऐप्स आपके फोन की संवेदनशील अनुमतियां (Permissions) जैसे स्टोरेज, कॉन्टैक्ट्स और लोकेशन मांगते हैं। ये ऐप्स बैकग्राउंड में लगातार चलते रहते हैं और आपके डेटा को ट्रैक करके आपको अनचाहे विज्ञापन (Ads) दिखाते हैं।

तो फोन को फास्ट करने के लिए क्या करें?

अगर आपका फोन स्लो हो रहा है, तो किसी भी बाहरी ऐप को डाउनलोड करने के बजाय इन आसान और सुरक्षित तरीकों को अपनाएं:

  1. इन-बिल्ट टूल का करें इस्तेमाल: आजकल सभी प्रमुख स्मार्टफोन ब्रांड्स (जैसे Samsung, Xiaomi, Realme, Vivo) के फोन में खुद का एक ‘Device Care’ या ‘Security’ टूल पहले से इन-बिल्ट आता है। यह पूरी तरह सुरक्षित होता है और बिना प्रोसेसर को नुकसान पहुंचाए कैशे (Cache) साफ करता है।

  2. मैन्युअली क्लियर करें कैशे: जो ऐप्स आप सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं (जैसे क्रोम, यूट्यूब), उनकी सेटिंग्स में जाकर समय-समय पर ‘Clear Cache’ कर दें।

  3. बेकार के ऐप्स को हटाएं: अपने फोन से उन ऐप्स को तुरंत डिलीट (Uninstall) कर दें, जिनका इस्तेमाल आप महीनों से नहीं कर रहे हैं। स्टोरेज खाली रहने से फोन अपने आप फास्ट काम करता है।

निष्कर्ष:

संक्षेप में कहें तो, प्ले स्टोर या ऐप स्टोर पर मिलने वाले रैम क्लीनर और फोन बूस्टर ऐप्स पूरी तरह से बेकार और दिखावा होते हैं। ये फोन को फास्ट नहीं, बल्कि बैकग्राउंड में खुद जगह घेरकर उसे और धीमा कर देते हैं। इसलिए, अपने स्मार्टफोन की सुरक्षा और स्पीड के लिए इन ऐप्स से हमेशा दूरी बनाकर रखें।


गोपाल चन्द्र अग्रवाल,सीनियर एडिटर

(Allrights Magazine)


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