डिजिटल अरेस्ट ठगी: ED ने CA समेत 3 को पकड़ा
गोवा ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी मामला: ED ने सीए समेत 3 और आरोपियों को किया गिरफ्तार, अब तक 5 की गिरफ्तारी
पणजी/गोवा: डिजिटल अरेस्ट के जरिए साइबर ठगी करने वाले एक अंतर्राष्ट्रीय और संगठित गिरोह पर शिकंजा कसते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पणजी जोनल कार्यालय ने बड़ी सफलता हासिल की है। PMLA, 2002 की धारा 19 के तहत कार्रवाई करते हुए ED ने 27 अगस्त 2026 को चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) भूषण सूर्यकांत मोये, विलास नारायण पवार और शैलेश दगडू चव्हाण को गिरफ्तार कर लिया है। विशेष PMLA अदालत ने तीनों आरोपियों को 1 सितंबर 2026 तक ED की कस्टडी में भेज दिया है।
इससे पहले 23 अगस्त 2026 को फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुईन सैयद को गिरफ्तार किया गया था। इसके साथ ही इस सनसनीखेज मामले में अब तक गिरफ्तार होने वाले आरोपियों की संख्या बढ़कर पाँच हो गई है।
डिजिटल अरेस्ट कर महिला से ठगे ₹2.60 करोड़ यह मामला साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन (नॉर्थ गोवा) द्वारा 9 जून 2025 को दर्ज एफआईआर (FIR No. 17/2025) से जुड़ा है। ठगों ने गोवा की एक महिला निवासी को वीडियो कॉल पर रखकर खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताया और उन्हें आपराधिक जांच के नाम पर डराया-धमकाया। आरोपियों ने पीड़िता को “सीक्रेट सुपरविज़न अकाउंट्स” के नाम पर फर्जी खातों में ₹2,60,33,634 (2.60 करोड़ रुपये से अधिक) ट्रांसफर करने के लिए मजबूर कर दिया था।
₹27,850 करोड़ से अधिक का संदिग्ध बैंकिंग लेनदेन ED की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि साइबर ठगी से जुटाए गए पैसों को एक संगठित नेटवर्क के जरिए ठिकाने लगाया जाता था। पीड़िता के पैसे को कैश में बदलकर और फिर आरबीआई (RBI) से लाइसेंस प्राप्त ‘फुल फ्लेज्ड मनी चेंजर’ (FFMC) कंपनियों के जरिए विदेशी मुद्रा (Foreign Currency) में परिवर्तित किया जाता था।
यह नेटवर्क फर्जी निदेशकों (Dummy Directors) के नाम पर बनी कंपनियों के 400 से अधिक बैंक खातों का इस्तेमाल कर रहा था। इन शेल कंपनियों के खिलाफ देश के 20 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 330 से ज्यादा पीड़ित शिकायतें और 163 प्राथमिकियां (FIRs) दर्ज हैं, जिनमें कुल ₹417.49 करोड़ के नुकसान की रिपोर्ट है। जांच में सामने आया है कि इन खातों के जरिए ₹27,850 करोड़ से अधिक का संदेहास्पद बैंकिंग लेनदेन किया जा चुका है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट ने बनाई थीं 21 फर्जी कंपनियां जांच अधिकारी के अनुसार, गिरफ्तार चार्टर्ड अकाउंटेंट भूषण सूर्यकांत मोये ने फर्जी पहचान पत्रों के आधार पर नेटवर्क की 21 कंपनियां बनाई थीं और 43 डमी निदेशकों के खातों का प्रबंधन खुद करता था। वहीं, विलास नारायण पवार आरटीजीएस (RTGS) के जरिए अवैध फंड का ट्रांसफर संभालता था और शैलेश दगडू चव्हाण उन ट्रांसफर के बदले कैश की आपूर्ति करता था। ED द्वारा 21 अगस्त 2026 को इनके ठिकानों पर छापेमारी की गई थी, जिसके बाद साक्ष्यों के आधार पर तीनों को गिरफ्तार कर कस्टडी में लिया गया है। मामले में आगे की विस्तृत जांच जारी है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

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