DHFL घोटाला: ED ने ₹51.75 करोड़ फ्रीज किए
DHFL बैंक धोखाधड़ी: ED की बड़ी कार्रवाई, वाधवान परिवार से जुड़े खातों में ₹51.75 करोड़ फ्रीज
नई दिल्ली/मुंबई: देश के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (DHFL) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की मुख्यालय जांच इकाई ने बड़ी सफलता हासिल की है। PMLA, 2002 के तहत 19 अगस्त 2026 को चलाए गए विशेष तलाशी अभियान के दौरान ED ने विदेशी संपत्ति की बिक्री से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग का भंडाफोड़ करते हुए ₹51.75 करोड़ (लगभग 5.41 मिलियन अमेरिकी डॉलर) की अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) को फ्रीज कर दिया है।
34,615 करोड़ रुपये के बैंक कंसोर्टियम घोटाले का मामला यह जांच सीबीआई (CBI, New Delhi) द्वारा यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और 17 बैंकों के कंसोर्टियम की शिकायत पर दर्ज एफआईआर के आधार पर जारी है। आरोप है कि कपिल वाधवान, धीरज वाधवान और उनके सहयोगियों ने साजिश रचकर बैंकों द्वारा स्वीकृत ₹42,871.42 करोड़ के ऋणों में से ₹34,615 करोड़ की भारी-भरकम राशि का गबन किया और खातों में हेरफेर कर बैंकों को चूना लगाया।
यूके की लग्जरी संपत्ति बेचकर विदेश में फंड ठिकाने लगाने की साजिश ED की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि यूके (UK) स्थित ‘हर्टमोर हाउस’ (Hurtmore House) नामक आलीशान विदेशी संपत्ति, जो कपिल वाधवान की पत्नी वनिता वाधवान के नाम पर दर्ज थी, उसे एक फर्जी लोन एग्रीमेंट के जरिए गुप्त रूप से बेच दिया गया। M/s Al Jalore Trading FZE नामक संस्था के साथ मिलकर यूके की संपत्ति को गिरवी रखा गया और वर्ष 2026 में संपत्ति की बिक्री से मिली रकम को वनिता वाधवान के खाते में भेजने के बजाय भारत में भारत की देनदारियों को निपटाने के लिए उक्त कंपनी के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया।
PMLA की धारा 17(1A) के तहत बैंक खाता फ्रीज छापेमारी के दौरान ED अधिकारियों ने M/s Al Jalore Trading FZE के भारतीय बैंक खाते की पड़ताल की और PMLA की धारा 17(1A) के तहत खाते में जमा 5.41 मिलियन डॉलर यानी ₹51.75 करोड़ की राशि को मौके पर ही फ्रीज कर दिया। इसके अलावा जांच टीम ने लेनदेन और विदेशी संपत्तियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण व आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए हैं। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

