बिलपावर धोखाधड़ी: ED की रेड, ₹12 करोड़ ज़ब्त
बिलपावर लिमिटेड पर ED का बड़ा शिकंजा: मुंबई और वडोदरा में छापेमारी, 12.20 करोड़ के गहने और नकदी जब्त
मुंबई/वडोदरा: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के साथ ₹160.55 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी और लोन डायवर्जन मामले में कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुंबई जोनल कार्यालय ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत ED ने 25 अगस्त 2026 को मुंबई और वडोदरा स्थित M/s बिलपावर लिमिटेड से जुड़े 7 आवासीय व व्यावसायिक ठिकानों और 3 बैंक लॉकरों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की।
CBI की FIR के आधार पर PMLA के तहत मामला दर्ज यह कार्रवाई सीबीआई (CBI-EO-I, दिल्ली) द्वारा भारतीय स्टेट बैंक की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी और 30 सितंबर 2024 को दाखिल चार्जशीट के आधार पर शुरू की गई। ट्रांसफॉर्मर लैमिनेशन का निर्माण करने वाली कंपनी M/s बिलपावर लिमिटेड का प्रबंधन राजेंद्र कुमार चौधरी, सुरेश कुमार चौधरी और नरेश कुमार चौधरी द्वारा किया जा रहा था। कंपनी ने 2005 से एसबीआई से कैश क्रेडिट, वर्किंग कैपिटल और बैंक गारंटी जैसी विभिन्न वित्तीय सुविधाएं लीं, जिसके बाद खातों में हेरफेर कर ₹160.55 करोड़ का लोन एनपीए (NPA) में बदल गया।
शेल कंपनियों के जरिए फंड डायवर्जन और फर्जी दस्तावेज़ ED की जांच में खुलासा हुआ कि बिलपावर लिमिटेड ने बैंक फंड की हेराफेरी और राउंड-ट्रिपिंग के लिए कई फर्जी/शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया। आरोपियों ने लेटर ऑफ क्रेडिट (LCs) हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और लोन की राशि को चौधरी परिवार व उनके सहयोगियों द्वारा नियंत्रित अन्य संस्थाओं के खातों में ट्रांसफर कर दिया।
12.20 करोड़ रुपये के गहने, नकदी और बैंक खाते फ्रीज छापेमारी के दौरान ED ने ₹12.20 करोड़ मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण और ₹43.90 लाख की नकदी जब्त की है। इसके अलावा PMLA की धारा 17(1A) के तहत ₹27 लाख की जमा राशि वाले दो बैंक खाते और तीन बैंक लॉकरों को फ्रीज कर दिया गया है। मौके से अचल संपत्तियों, भूमि, मशीनरी के दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए गए हैं। मामले में आगे की वित्तीय जांच जारी है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

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