धार भोजशाला मंदिर है: हाई कोर्ट का फैसला

धार भोजशाला ‘मंदिर’ ही है: इंदौर हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला; लंदन से वाग्देवी की प्रतिमा लाने का आदेश

(इंदौर/नई दिल्ली): मध्य प्रदेश के धार जिले की विवादित भोजशाला को लेकर इंदौर हाई कोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से धार भोजशाला को मंदिर घोषित किया है। इस फैसले के साथ ही वर्षों से चले आ रहे धार्मिक स्वरूप के विवाद पर एक बड़ा कानूनी निर्णय सामने आया है।


हाई कोर्ट के फैसले की 3 बड़ी बातें:

  1. भोजशाला अब मंदिर: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने परिसर के धार्मिक स्वरूप को मंदिर माना है। मंदिर पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब हिंदुओं को पूर्ण पूजा का अधिकार मिल गया है।

  2. मस्जिद पक्ष को अलग जमीन: अदालत ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा है कि मस्जिद पक्ष को इबादत के लिए अलग स्थान उपलब्ध कराया जाए। इसके लिए मस्जिद पक्ष सरकार को आवेदन दे सकता है, जिसके बाद सरकार उन्हें अलग जमीन आवंटित करेगी।

  3. वाग्देवी की घर वापसी: कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि इंग्लैंड (लंदन) के म्यूजियम में रखी माता वाग्देवी (सरस्वती) की मूल प्रतिमा को भारत वापस लाने के लिए कूटनीतिक और कानूनी प्रयास तेज किए जाएं।

क्या था विवाद?

धार की भोजशाला को हिंदू पक्ष राजा भोज द्वारा निर्मित सरस्वती मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है। अब तक की व्यवस्था के अनुसार, मंगलवार को हिंदुओं को पूजा और शुक्रवार को मुस्लिमों को नमाज की अनुमति थी। हाल ही में एएसआई (ASI) द्वारा किए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षण और पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर हाई कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है।

सांस्कृतिक और धार्मिक जीत

इस फैसले के बाद धार और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। हिंदू संगठनों ने इसे ‘सत्य की जीत’ बताया है। कोर्ट के इस निर्णय से अब भोजशाला परिसर के पुनरुद्धार और वाग्देवी की प्रतिमा की वापसी का मार्ग प्रशस्त हो गया है।


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