दिल्ली: AAP सरकार पर तीखा प्रहार
दिल्ली के विकास और प्रशासनिक मॉडल पर हमला: पूर्व AAP सरकार पर जनता के पैसों की उपेक्षा का आरोप
विशेष दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजनीति ब्यूरो: नई दिल्ली
रिपोर्ट: ऑल Rights मैगज़ीन ब्यूरो
राजधानी दिल्ली के बुनियादी ढांचे, जनसुविधाओं और प्रशासनिक मॉडल को लेकर राजनीतिक घमासान जारी है। सत्तारूढ़ पक्षों और राजनीतिक विश्लेषकों द्वारा आम आदमी पार्टी (AAP) के पिछले कार्यकाल की नीतियों, कार्यशैली और वित्तीय प्रबंधन पर तीखे सवाल खड़े किए गए हैं।
“इरादों की कमी और संसाधनों की उपेक्षा”
प्रेस वार्ताओं और राजनीतिक बयानों के जरिए पूर्ववर्ती सरकार की कार्यप्रणाली की आलोचना करते हुए मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दे उठाए गए:
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सफाई और इंफ्रास्ट्रक्चर की अनदेखी: आरोप लगाया गया कि यमुना की सफाई, कूड़े के पहाड़ों (कचरे के ढेर) को हटाने और दिल्ली की जर्जर सड़कों की मरम्मत को लेकर पूर्व सरकार में कोई तत्परता या प्रतिबद्धता नहीं दिखाई दी।
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बजट और अधिकारों का दुरुपयोग: यह तर्क दिया गया कि दिल्ली को बेहतर सड़कों, अस्पतालों, दवाओं, स्कूलों और सार्वजनिक परिवहन की सख्त जरूरत थी। इसके लिए सरकार के पास बजट (Funds) भी उपलब्ध था और प्रशासनिक अधिकार भी, लेकिन जनता के विकास के लिए मिले पैसों का सही इस्तेमाल नहीं किया गया।
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इरादे पर सवाल: राजनीतिक विरोधियों का कहना है कि समस्या संसाधनों या धन की कमी की नहीं, बल्कि सरकार की मंशा और इच्छाशक्ति में खराबी की थी।
अनोखे प्रशासनिक मॉडल पर निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री के कामकाज के तरीके पर हमला बोलते हुए कहा गया कि आम आदमी पार्टी ने संभवतः देश की ऐसी इकलौती सरकार चलाई जहाँ:
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बिना विभाग के नियंत्रण: मुख्यमंत्री के पास कोई भी सीधा विभाग नहीं था और वे किसी आधिकारिक फाइल पर हस्ताक्षर नहीं करते थे।
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जवाबदेही से दूरी: बिना किसी औपचारिक जिम्मेदारी को स्वीकार किए पूरे शासन और प्रशासनिक तंत्र पर पूर्ण नियंत्रण रखा गया।
सीएजी (CAG) रिपोर्टों के सामने आने के बाद से ही दिल्ली के विकास, यमुना की सफाई और स्वास्थ्य-शिक्षा मॉडल पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया है।
राजनीतिक ब्यूरो: नई दिल्ली
ऑल Rights मैगज़ीन (डिजिटल न्यूज़ नेटवर्क)
सीनियर एडिटर गोपाल चन्द्र अग्रवाल

