राज्यसभा टिकट पर घिरी भाजपा: राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी को उम्मीदवार बना निशाने पर आई पार्टी
“भाजपा के ‘परिवारवाद विरोधी’ दावों पर उठे सवाल: झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी को बनाया राज्यसभा उम्मीदवार, विपक्ष ने बोला तीखा हमला”
नई दिल्ली: ‘वंशवाद’ और ‘परिवारवाद’ के मुद्दे पर विरोधी दलों पर लगातार हमलावर रहने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक बार फिर अपने ही फैसलों को लेकर कटघरे में खड़ी हो गई है। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची में भाजपा ने झारखंड के वर्तमान राज्यपाल और 8 बार के पूर्व सांसद संतोष कुमार गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार को टिकट देकर मैदान में उतारा है।
इस घोषणा के बाद विपक्षी दलों ने भाजपा की ‘कथनी और करनी’ के अंतर को उजागर करते हुए तीखा राजनीतिक हमला बोला है।
“एक ही परिवार में सारे पद क्यों?”: विपक्ष का सीधा सवाल
विपक्षी नेताओं का कहना है कि जो भाजपा सार्वजनिक मंचों से परिवारवाद को खत्म करने की कसमें खाती है, वह खुद अपने कद्दावर नेताओं के परिवारों को ही सत्ता के शीर्ष पदों पर बिठाने में जुटी है।
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एक ही घर में दो बड़े संवैधानिक व विधायी पद: संतोष कुमार गंगवार खुद झारखंड के राज्यपाल जैसे शीर्ष संवैधानिक पद पर आसीन हैं। अब उनकी बेटी को संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) भेजने की तैयारी की जा रही है।
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निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा: विपक्षी प्रवक्ताओं का आरोप है कि दशकों तक पार्टी के लिए पसीना बहाने वाले समर्पित और जमीनी कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर केवल ‘बड़े नेताओं की संतानों’ को ही राज्यसभा की टिकटें बांटी जा रही हैं।
विपक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के लिए परिवारवाद केवल तभी तक अपराध है जब तक वह विरोधी दलों में हो; अपने नेताओं के मामले में यह ‘योग्यता’ बन जाता है।
