बिहार: ऐतिहासिक धरोहरों का कायाकल्प
बिहार: CM सम्राट चौधरी का बड़ा फैसला — मां मुंडेश्वरी, बोधगया, सुल्तानगंज, मंदार और केसरिया को मिलेगा विश्वस्तरीय स्वरूप
विशेष प्रादेशिक एवं विकास ब्यूरो: पटना (बिहार)
रिपोर्ट: नरेश अग्रवाल
बिहार की हजारों साल पुरानी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए राज्य सरकार ने एक महा-अभियान की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने आज मां मुंडेश्वरी मंदिर, बोधगया, सुल्तानगंज, मंदार पर्वत और केसरिया स्तूप के वैज्ञानिक सर्वे, संरक्षण और समग्र विकास के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री से आज देश के ख्यातिप्राप्त वरिष्ठ पुरातत्वविदों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की और मां मुंडेश्वरी मंदिर परिसर (कैमूर) के सर्वे की प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी।
इन 4 प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों का होगा वैज्ञानिक कायाकल्प:
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मां मुंडेश्वरी एवं कैमूर क्षेत्र (हेरिटेज-इको टूरिज्म सर्किट): मंदिर परिसर में बिखरे हजारों प्राचीन भग्नावशेषों का वैज्ञानिक पुनर्स्थापन (Reconstruction) होगा। पूरे कैमूर को हेरिटेज और इको-टूरिज्म सर्किट के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें तिलहाड़ कुंड और करकटगढ़ जैसे प्राकृतिक स्थलों को जोड़ा जाएगा। यह क्षेत्र बनारस-कोलकाता एक्सप्रेसवे से महज 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
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बोधगया में हाईटेक LiDAR और GPR सर्वे: महाबोधि मंदिर परिसर के आसपास LiDAR और GPR (ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार) जैसी आधुनिक तकनीकों से बिना खुदाई किए भू-गर्भ वैज्ञानिक सर्वे होगा, ताकि जमीन के नीचे छिपी पुरातात्विक संरचनाओं की सटीक पहचान की जा सके।
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केसरिया स्तूप का पूर्ण उत्खनन: विश्व के सबसे बड़े बौद्ध स्तूपों में शुमार पूर्वी चंपारण के केसरिया स्तूप के शेष हिस्से का वैज्ञानिक उत्खनन अब और तेज किया जाएगा। (अब तक इसका केवल आंशिक उत्खनन ही हो सका था)।
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सुल्तानगंज और मंदार पर्वत: भागलपुर व बांका के इन प्रसिद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
“इतिहास के नए अध्याय खुलेंगे, बढ़ेगा रोजगार” — मुख्यमंत्री
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा:
“बिहार की पावन धरती के नीचे अब भी अनेक अमूल्य पुरातात्विक धरोहरें सुरक्षित हैं। इनकी वैज्ञानिक पहचान और संरक्षण से राज्य के गौरवशाली इतिहास के नए अध्याय खुलेंगे। इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए नए रोजगार पैदा होंगे और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।”
बैठक में उपस्थित पुरातत्वविदों और विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि इन स्थलों के कायाकल्प और विकास के बाद इन्हें यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए प्रयास किए जाएंगे।
बैठक में उपस्थित प्रमुख हस्तियां
इस उच्चस्तरीय बैठक में विश्व प्रसिद्ध पुरातत्वविद् पद्मश्री डॉ० के०के० मोहम्मद, बिहार विरासत विकास समिति के प्रो० डॉ० रजत सान्याल व प्रो० अनिल कुमार, ASI पटना मंडल के डॉ० हरिओम शर्मा, विकास आयुक्त श्री मिहिर कुमार सिंह तथा सचिव श्री प्रणव कुमार समेत कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
प्रादेशिक एवं विकास ब्यूरो: पटना (बिहार)
ऑल Rights मैगज़ीन (डिजिटल न्यूज़ नेटवर्क)
सीनियर एडिटर गोपाल चन्द्र अग्रवाल

