बरेली: दुष्कर्म में पंचायत का अवैध फैसला, गोद भराई कराई
बरेली में नाबालिग से दुष्कर्म मामले में कानून ताक पर: पंचायत ने कराया ‘समझौता’, पुलिस की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
बरेली (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के शीशगढ़ थाना क्षेत्र से कानून-व्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को झकझोर देने वाली बेहद गंभीर व चिंताजनक घटना सामने आई है। एक नाबालिग किशोरी से एक वर्ष तक डरा-धमकाकर दुष्कर्म और अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने के संगीन मामले में गांव की पंचायत ने देश के कानून और न्यायिक प्रक्रिया को पूरी तरह ताक पर रख दिया। पंचायत ने पीड़िता के बालिग होने पर आरोपी से शादी कराने का फैसला सुनाते हुए बाकायदा ‘गोद भराई’ और ‘टीके’ की रस्म भी संपन्न करा दी।
वर्ष 2026 में भी किसी नाबालिग के खिलाफ हुए जघन्य अपराध में पंचायत द्वारा समानांतर न्याय प्रणाली (Parallel Justice System) चलाकर आरोपी को बचाने का यह प्रयास सीधे तौर पर भारत के संविधान और पॉक्सो (POCSO) एक्ट को खुली चुनौती है।
डरा-धमकाकर एक साल तक दुष्कर्म, पुलिस ने नहीं की सुनवाई
पीड़िता की आपबीती और पुलिस की शिथिलता ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं:
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ब्लैकमेलिंग और प्रताड़ना: पीड़िता की मां के अनुसार, पड़ोस का युवक पिछले एक साल से किशोरी को डरा-धमकाकर और अश्लील फोटो-वीडियो इंटरनेट पर वायरल करने की धमकी देकर दुष्कर्म कर रहा था।
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16 सितंबर की शिकायत पर लापरवाही: जब रोती हुई बेटी ने मां को अपनी दर्दनाक स्थिति बताई, तो मां ने 16 सितंबर को थाना शीशगढ़ में लिखित शिकायत दर्ज कराई। आरोप है कि पुलिस ने पीड़िता की फरियाद को गंभीरता से नहीं लिया और कोई सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की।
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पुलिस का गैर-जिम्मेदाराना रवैया: मामला मीडिया में आने के बाद पुलिस प्रशासन द्वारा इसे महज ‘प्रेम प्रसंग’ बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की जा रही है, जो बेहद दुखद और गैर-जिम्मेदाराना है।
पंचायत को कानून दरकिनार करने का अधिकार किसने दिया?
पुलिस की ढिलाई का फायदा उठाकर गांव में बुलाई गई पंचायत ने दुष्कर्म के आरोपी को बचाने के लिए गैर-कानूनी फरमान सुना दिया:
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गैर-कानूनी समझौता नामा: पंचायत ने शर्त रखी कि किशोरी के बालिग होने पर आरोपी उससे शादी करेगा। 21 सितंबर को दोनों पक्षों की उपस्थिति में ‘गोद भराई’ की रस्म भी पूरी कर दी गई और स्टाम्प/कागज पर समझौता लिखवाया गया।
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पॉक्सो एक्ट में समझौते का कोई प्रावधान नहीं: भारतीय कानून और सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के स्पष्ट आदेश हैं कि नाबालिग से दुष्कर्म/यौन उत्पीड़न एक गैर-जमानती और अशमनीय (Non-Compoundable) अपराध है। इसमें किसी भी तरह का समझौता या शादी का फैसला पूरी तरह असंवैधानिक और अवैध है।
त्वरित एफआईआर और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की आवश्यकता
यह घटना स्पष्ट करती है कि स्थानीय स्तर पर आज भी पॉक्सो एक्ट जैसे सख्त कानूनों को ठेंगा दिखाने का प्रयास किया जा रहा है:
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आरोपी पर पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज हो: पुलिस प्रशासन को तुरंत मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर पॉक्सो एक्ट, दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग की धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज कर जेल भेजना चाहिए।
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पंचायत में शामिल लोगों पर बने सह-अभियुक्त: कानून को अपने हाथ में लेने, नाबालिग के अधिकारों का हनन करने और अपराध को छिपाने के जुर्म में पंचायत बुलाने वाले और इस अवैध समझौते में शामिल जिम्मेदार लोगों पर भी सख्त कानूनी मामला दर्ज होना चाहिए।
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लापरवाह पुलिसकर्मियों पर गाज गिरे: 16 सितंबर को दी गई शिकायत पर त्वरित संज्ञान न लेने वाले शीशगढ़ थाने के संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच कर उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
‘ऑल राइट्स मैगजीन’ बेटियों की सुरक्षा, कानून के शासन और पीड़ितों को न्याय दिलाने की पक्षधर है। संस्था मांग करती है कि बरेली पुलिस इस मामले में बिना किसी दबाव के निष्पक्ष कार्रवाई करे और पीड़िता को त्वरित न्याय व चिकित्सा/मानसिक संबल प्रदान करे।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)
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