बिहार में जमीन रजिस्ट्री के नए नियम लागू

Bihar Bhumi: बिहार में जमीन रजिस्ट्री के नए नियम लागू; बढ़ने जा रहा है सरकारी रेट (MVR), फर्जीवाड़े पर लगेगी पूरी तरह लगाम

बिहार में जमीन-जायदाद (Land & Property) की खरीद-बिक्री करने वालों के लिए एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण खबर है। राज्य सरकार के मद्यनिषेध, उत्पाद एवं निबन्धन विभाग ने बिहार में जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और भू-माफियाओं के सिंडिकेट को तोड़ने के लिए नए रजिस्ट्री नियम लागू कर दिए हैं। इस नए कानून के तहत जहां एक तरफ जमीनों का सरकारी रेट (Minimum Valuation Rate – MVR) बढ़ने जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ फर्जीवाड़े और अवैध कब्जे पर पूरी तरह से लगाम लग जाएगी।

🎯 नए नियमों के 3 सबसे बड़े और मुख्य बदलाव

बिहार भूमि सुधार और निबंधन विभाग द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार जमीन रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया में निम्नलिखित क्रांतिकारी बदलाव किए गए हैं:

1. जमाबंदी (Jamabandi) धारक ही बेच सकेंगे जमीन

  • फर्जीवाड़ा खत्म: नए नियम के तहत अब वही व्यक्ति जमीन बेच सकता है, जिसके नाम से सरकारी रिकॉर्ड में ‘जमाबंदी’ (खाता-खेसरा) कायम होगी।

  • पुश्तैनी जमीनों का नियम: यदि जमीन दादा-परदादा या पिता के नाम पर है, तो पहले आपसी बंटवारे का कानूनी दस्तावेज (Partition Deed) बनवाकर अपने नाम पर जमाबंदी करानी होगी, उसके बाद ही रजिस्ट्री संभव हो पाएगी। इससे दूसरे की जमीन धोखे से बेचने का खेल पूरी तरह बंद हो जाएगा।

2. बढ़ने जा रहा है जमीनों का सरकारी रेट (MVR)

  • राजस्व में होगी बढ़ोतरी: सरकार राज्य के सभी शहरी, अर्द्ध-शहरी और विकासशील ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनों के न्यूनतम सरकारी मूल्य (MVR) को संशोधित (बढ़ाने) करने जा रही है।

  • सर्किल रेट में बदलाव: विकास योजनाओं (जैसे- एक्सप्रेसवे, फोरलेन, इंडस्ट्रियल एरिया) के पास की जमीनों के सरकारी रेट में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी, जिससे रजिस्ट्री शुल्क भी बढ़ेगा और सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी।

3. बायोमेट्रिक और आधार ऑथेंटिकेशन अनिवार्य

  • पहचान की सटीक जांच: रजिस्ट्री कार्यालय में क्रेता (खरीदने वाला), विक्रेता (बेचने वाला) और गवाहों का आधार कार्ड लिंक होना और बायोमेट्रिक (अंगूठे का निशान व आईरिस स्कैन) ऑथेंटिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। इससे ‘फर्जी गवाह’ या किसी दूसरे के स्थान पर खड़े होकर रजिस्ट्री करने का फर्जीवाड़ा नामुमकिन हो जाएगा।

💡 आम जनता को क्या होगा सबसे बड़ा फायदा?

  • अदालती मुकदमों से मुक्ति: बिहार में होने वाले कुल आपराधिक मामलों और दीवानी मुकदमों (Civil Cases) में से 60% से अधिक मामले जमीन विवाद के होते हैं। इस नियम से मालिकाना हक पूरी तरह साफ रहेगा, जिससे भविष्य के विवाद समाप्त हो जाएंगे।

  • पारदर्शिता: जमीन की खरीद-बिक्री का पूरा डेटा तुरंत ‘बिहार भूमि’ (Bihar Bhumi) पोर्टल पर अपडेट हो जाएगा, जिससे म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) की प्रक्रिया भी बेहद आसान और त्वरित हो जाएगी।

विभाग ने सभी जिला अवर निबंधक (Sub-Registrars) को सख्त निर्देश दिए हैं कि बिना नई गाइडलाइन और पुख्ता जमाबंदी जांच के किसी भी डीड (Deed) को पंजीकृत न किया जाए।


(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)

 एडिटर (Allrights Magazine)

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