बिहार: 4 महीने में 453 को उम्रकैद

बिहार में अपराधियों पर नकेल: 4 महीने में 7,624 को सजा, 453 को उम्रकैद; साइबर ठगों के खिलाफ भी महाभियान

 बिहार में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने और अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुँचाने की प्रक्रिया में बड़ी तेजी आई है। वर्ष 2026 के शुरुआती चार महीनों (जनवरी से अप्रैल) के आंकड़ों के अनुसार, राज्य की पुलिस और अभियोजन पक्ष ने मिलकर रिकॉर्ड संख्या में अपराधियों को सजा दिलाने में सफलता हासिल की है।


सजा की दर में भारी उछाल: हत्या और दुष्कर्म के मामलों में कड़ा रुख

पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान एडीजी (मुख्यालय) सुनील कुमार ने बताया कि कानून का डर अपराधियों में साफ दिख रहा है:

  • आजीवन कारावास: चार महीनों के भीतर 453 अपराधियों को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

  • फांसी की सजा: फरवरी माह में दो खूंखार अपराधियों को फांसी की सजा भी सुनाई गई।

  • कठोर दंड: 253 अभियुक्तों को 10 वर्ष या उससे अधिक की सजा मिली है।

  • विशेष मामले: पॉक्सो और रेप के 218 मामलों में 267 अभियुक्तों को सजा दिलाकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई। हत्या के 213 मामलों में 508 अपराधियों को दोषी ठहराया गया।

साइबर अपराधियों पर स्ट्राइक: 1,200 बैंक खाते बंद

आईजी साइबर रणजीत कुमार मिश्रा ने साइबर अपराध के खिलाफ की गई बड़ी कार्रवाई की जानकारी साझा की:

  • वित्तीय रिकवरी: राज्य में कुल 199 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का पता चला, जिसमें से पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 51.84 करोड़ रुपये होल्ड (फ्रीज) करा दिए।

  • गिरफ्तारी व ब्लॉक: 602 साइबर अपराधी गिरफ्तार किए गए। साथ ही 4,147 मोबाइल नंबर और 638 IMEI नंबरों को ब्लॉक कर दिया गया है।

  • बैंक कर्मियों पर गाज: फर्जीवाड़े में संलिप्त 5 बैंक कर्मियों और 162 फर्जी सिम बेचने वाले POS एजेंटों पर भी कानूनी कार्रवाई की गई।

  • हेल्पलाइन 1930: साइबर ठगी की शिकायतों के लिए जारी हेल्पलाइन पर कॉल की संख्या बढ़कर रोजाना 8,100 तक पहुंच गई है।

प्रशासनिक बदलाव: कानून-व्यवस्था होगी और मजबूत

एडीजी (विधि-व्यवस्था) सुधांशु कुमार ने बताया कि बढ़ते अपराध नियंत्रण की जरूरतों को देखते हुए मोतिहारी, समस्तीपुर, वैशाली, सीवान और मधुबनी जैसे बड़े जिलों में ‘एसपी ग्रामीण’ (SP Rural) का नया पद सृजित किया गया है। इससे ग्रामीण इलाकों में पुलिस की निगरानी और पकड़ मजबूत होगी।

बिहार पुलिस की इस सक्रियता से स्पष्ट है कि राज्य सरकार ‘स्पीडी ट्रायल’ के माध्यम से न्याय व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है।


(पटना – विक्रम कुमार):

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,सीनियर एडिटर

(Allrights Magazine)

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