बरेली: स्वास्थ्य विभाग का शर्मनाक खेल
बरेली जिला महिला अस्पताल में शर्मनाक लापरवाही: मरीजों को एम्बुलेंस का इंतजार, स्वास्थ्य विभाग उसी एम्बुलेंस से ढो रहा है दवाइयाँ!
Bareilly News: यूपी के बरेली से स्वास्थ्य विभाग की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। जहाँ एक तरफ गर्भवती महिलाएँ प्रसव पीड़ा में एम्बुलेंस के लिए तड़प रही हैं, वहीं दूसरी ओर जिला महिला अस्पताल प्रशासन उन्हीं एम्बुलेंस का इस्तेमाल ‘डिलीवरी वैन’ के तौर पर दवाइयाँ ढोने के लिए कर रहा है।
मरीजों की जान दांव पर, एम्बुलेंस बनी ‘मालगाड़ी’
बरेली का जिला महिला अस्पताल इन दिनों अपनी बदहाली और प्रशासनिक लापरवाही के कारण चर्चा में है। जो एम्बुलेंस गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को जीवनदान देने के लिए रिजर्व होनी चाहिए, उनमें आजकल दवा की गोलियां, सिरप और इंजेक्शन के डिब्बे लादे जा रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि:
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एम्बुलेंस न मिलने के कारण गरीब परिवारों को महंगे प्राइवेट वाहन करने पड़ रहे हैं।
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गंभीर स्थिति में रेफर होने वाले मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।
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अस्पताल रोड पर अतिक्रमण के कारण पहले ही एम्बुलेंस को रास्ता नहीं मिलता, ऊपर से अब गाड़ियों का गैर-जरूरी इस्तेमाल संकट को बढ़ा रहा है।
प्रशासनिक फेल्योर या जानबूझकर लापरवाही?
यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या स्वास्थ्य विभाग के पास दवाइयों की सप्लाई के लिए एक साधारण वाहन की व्यवस्था तक नहीं है? या फिर जानबूझकर उन संसाधनों का दुरुपयोग किया जा रहा है जो सीधे तौर पर इंसानी जान से जुड़े हैं।
बरेली में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल कोई नई बात नहीं है। कभी डीजल की कमी तो कभी चालकों की हड़ताल—मुसीबत हमेशा गरीब जनता के सिर ही आती है। लेकिन एम्बुलेंस को ‘दवा ट्रांसपोर्टर’ बनाना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।
इन सवालों के जवाब कौन देगा?
शहर की जनता अब स्वास्थ्य मंत्री और जिलाधिकारी से सीधे सवाल पूछ रही है:
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सिस्टमेटिक फेल्योर: क्या अधिकारियों को इस बात की खबर नहीं है कि एम्बुलेंस का गलत इस्तेमाल हो रहा है?
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जिम्मेदारी: अगर एम्बुलेंस न मिलने के कारण किसी मरीज की जान जाती है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?
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समाधान कब: क्या दवा सप्लाई के लिए अलग वाहनों का इंतजाम करना इतना मुश्किल है?
वक्त है सख्त कार्रवाई का (Editor’s Take)
बरेली की महिलाओं और माताओं के स्वास्थ्य के साथ यह खिलवाड़ अब बंद होना चाहिए। हमारी मांग है कि:
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तत्काल प्रभाव से दवा सप्लाई के लिए अलग लॉजिस्टिक व्यवस्था की जाए।
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एम्बुलेंस को सिर्फ और सिर्फ आपातकालीन सेवाओं के लिए फ्री रखा जाए।
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इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।
स्वास्थ्य विभाग को अब जागना होगा! मरीजों की एम्बुलेंस उन्हें वापस लौटाइए और दवाइयों का बोझ किसी और वाहन पर डालिए—वरना ये लापरवाही किसी की जान पर भारी पड़ सकती है।
रिपोर्ट: रोहिताश कुमार (बरेली)

