आयुष्मान कार्ड गिरोह का सदस्य चक्रशेरू गिरफ्तार
लखनऊ: ओटीपी बाईपास कर फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाने वाले संगठित गिरोह का भंडाफोड़, एसटीएफ ने चक्रशेरू को किया गिरफ्तार
प्रेस नोट संख्या: 163
दिनांक: 03 जून 2026
(लखनऊ): उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक बड़े संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए लखनऊ से एक शातिर अपराधी को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह अनधिकृत और फर्जी तरीके से हजारों अपात्र व्यक्तियों का आयुष्मान कार्ड बनवाकर सरकार के राजस्व को भारी क्षति पहुँचा रहा था। एसटीएफ मुख्यालय की साइबर टीम और थाना साइबर क्राइम लखनऊ की संयुक्त कार्रवाई में अभियुक्त को रंगे हाथों दबोचा गया।
गिरफ्तारी और अभियुक्त का विवरण
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अभियुक्त का नाम: चक्र शेरू उर्फ अभिषेक उर्फ अजय (उम्र करीब 25 वर्ष, शिक्षा- बीएससी)।
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निवासी: ग्राम करामत खेड़ा, थाना कासिमपुर, हरदोई। वर्तमान पता- मुनेश्वर पुरम कॉलोनी, आलम नगर स्टेशन के पास, थाना तालकटोरा, लखनऊ।
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गिरफ्तारी का स्थान व समय: अवी सीएससी, बजरंग बिहार, बुद्धेश्वर (थाना क्षेत्र पारा, लखनऊ) से दिनांक 02 जून 2026 को शाम 16:50 बजे गिरफ्तार किया गया।
भारी मात्रा में उपकरण और कार बरामद
एसटीएफ ने अभियुक्त के पास से कूटरचित दस्तावेज और डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं, जिनका उपयोग फर्जी कार्ड बनाने के लिए किया जाता था:
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01 अदद मोबाइल फोन और 01 लैपटाप
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02 सीपीयू, 01 मानीटर, 01 थम्बस्कैनर और 01 वेबकैम
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01 प्रिंटर, 01 आयुष्मान कार्ड और 01 मोहर
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02 पैन कार्ड, 06 आधार कार्ड और 01 सीएससी आईडी कार्ड
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मोबाइल से प्राप्त फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाने से संबंधित स्क्रीनशॉट डेटा
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01 किया सेल्टास कार (नम्बर: यूपी 32 क्यूवाई 3492) और ₹1,320 नकद
कैसे काम करता था यह हाईटेक फर्जीवाड़ा गिरोह?
पूछताछ में चक्रशेरू ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसने बताया कि वह 2023 में एसएससी की कोचिंग करने लखनऊ आया था और बाद में एम्बुलेंस ऑफिस में गार्ड की नौकरी करने लगा। मार्च 2025 में उसका संपर्क सीएससी संचालक अवनीश और उसके मित्र चंद्रभान वर्मा से हुआ। इसके बाद अप्रैल 2025 में हजरतगंज के विन्ड क्लब में उसकी मुलाकात एक सॉफ्टवेयर डेवलपर से कराई गई।
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ओटीपी बाईपास सॉफ्टवेयर: सॉफ्टवेयर डेवलपर ने एक फर्जी पोर्टल बनाया था, जिसमें उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों की फैमिली आईडी का डेटा मौजूद था।
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ऐसे होता था खेल: अपात्र व्यक्ति के आधार पर दर्ज पिता के नाम और जिले के अनुसार मैचिंग (पात्र) फैमिली खोजी जाती थी। इसके बाद अपात्र व्यक्ति को उस फैमिली में ‘ऐड मेंबर’ कर दिया जाता था। इस फर्जी पोर्टल की खासियत यह थी कि आधार का ओटीपी परिवार के मुखिया के पास न जाकर, सीधे जोड़े जा रहे नए सदस्य के मोबाइल पर आता था। यह सॉफ्टवेयर डेवलपर बार-बार अपनी वेबसाइट बदलता रहता था, जो मूल बेनिफिशियरी वेबसाइट को रीडायरेक्ट करती थी।
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अधिकारियों की मिलीभगत: चंद्रभान वर्मा कार्ड अप्रूवल का काम आईएसए (Implementation Support Agency) में सुजीत कनौजिया, राजेश मिश्रा व सौरभ के माध्यम से कराता था। जो कार्ड वहां से रिजेक्ट होते, उन्हें एसएचए (State Health Agency) में विश्वजीत के माध्यम से एप्रूव कराया जाता था।
1500 से अधिक फर्जी कार्ड: अभियुक्त ने स्वीकार किया कि उसने पिछले एक साल में अकेले ही करीब 1500 फर्जी आयुष्मान कार्ड बनवाए हैं, जिनके जरिए अपात्र लोगों ने अस्पतालों में मुफ्त इलाज कराकर सरकार को करोड़ों का चूना लगाया है।
पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां, कानूनी कार्रवाई जारी
श्री विशाल विक्रम सिंह (अपर पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ, उ०प्र०) के पर्यवेक्षण में इस गैंग के खिलाफ लगातार कार्रवाई चल रही है। इससे पहले 17 जून 2025 को प्रयागराज से 02 सदस्य और 24 दिसंबर 2025 को लखनऊ से 07 सदस्यों (चन्द्रभान वर्मा, राजेश मिश्रा, सुजीत कनौजिया आदि) को गिरफ्तार किया जा चुका है।
वर्तमान में गिरफ्तार अभियुक्त चक्रशेरू के खिलाफ थाना साइबर क्राइम, लखनऊ में मु०अ०सं० 212/2025 के तहत बीएनएस (BNS) और आईटी एक्ट की विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा।
(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)
एडिटर (Allrights Magazine)

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