बरेली में अवध की रामलीला: 64 वर्षों की परंपरा

“बरेली में सज रही अवध की रामलीला: 64 सालों से आ रहे कलाकार, गांव-गांव जगा रहे आस्था की लौ”

बरेली (उत्तर प्रदेश): नाथ नगरी बरेली में अवध और तराई क्षेत्र के रामलीला कलाकारों द्वारा पिछले 64 वर्षों से अनवरत चली आ रही रामलीला मंचन की अनूठी परंपरा आज भी जीवंत है। ‘श्री दुर्गा विजय आदर्श रामलीला अयोध्या धाम पार्टी’ के बैनर तले जुटे ये कलाकार गांव-गांव जाकर भगवान श्री राम के आदर्शों और त्रेतायुग की पावन गाथा को जीवंत कर रहे हैं।

कैंट-जंक्शन मार्ग पर लगे शिविर में शाम ढलते ही चहल-पहल बढ़ जाती है। कोई मुकुट संवारता है, तो कोई धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाता है। दर्पण के सामने संवाद दोहराते ये कलाकार जब मंच पर उतरते हैं, तो उनके वास्तविक नाम पीछे छूट जाते हैं और वे राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान तथा रावण के स्वरूप में ढल जाते हैं।

1960 से जारी है परंपरा; मवई जरेल और मनौना धाम में आयोजन

सीतापुर निवासी मंडल संचालक मोनू मिश्रा ने बताया कि उनके पूर्वज वर्ष 1960 से बरेली की माटी पर रामलीला का मंचन करते आ रहे हैं। बरेली वासियों के असीम स्नेह और आस्था के कारण दशकों से यह मंडली जन्माष्टमी पर यहां शिविर लगाती है और दशहरा तक रुककर रावण वध के पश्चात प्रस्थान करती है।

  • मवई जरेल (बहेड़ी) में मंचन: भमौरा के बाद अब यह मंडली 28 सितंबर से 8 अक्टूबर तक बहेड़ी के मवई जरेल में नारद मोह और विश्व मोहिनी स्वयंवर से लेकर रावण वध तक की लीला का मंचन करेगी।

  • मनौना धाम और बदायूं में आगामी कार्यक्रम: इसके पश्चात 24 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक प्रसिद्ध मनौना धाम में मंचन होगा और दशहरा के बाद बदायूं के जगत ब्लॉक में भी कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।

22 कलाकारों का संगम: कौन निभा रहा कौन सा किरदार?

इस रामलीला मंडली में लखनऊ मंडल, सीतापुर, लखीमपुर खीरी से लेकर बिहार तक के 22 सिद्धहस्त कलाकार शामिल हैं:

कलाकार का नाम निवासी निभाया जाने वाला पात्र
निगम यादव लखनऊ भगवान श्री राम एवं अंगद
संतजी मधुबनी (बिहार) संकटमोचन हनुमान
श्यामू शर्मा सीतापुर लंकापति रावण
कमलेश शर्मा लखीमपुर खीरी माता कैकेई
कमल किशोर शर्मा लखीमपुर खीरी भरत
सुनील लखीमपुर खीरी शत्रुघ्न

‘ऑल राइट्स मैगजीन’ भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और लोक कला को छह दशकों से सहेजने वाले इन समर्पित रंगमंच कर्मियों के योगदान की सराहना करती है।

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