64 हजार हेक्टेयर भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराकर आज उत्तर प्रदेश में गांव से लेकर प्रदेश स्तर तक खेल के मैदान, मिनी स्टेडियम, स्टेडियम और इंटरनेशनल स्टेडियम विकसित किए जा रहे हैं।
64 हजार हेक्टेयर भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराकर आज उत्तर प्रदेश में गांव से लेकर प्रदेश स्तर तक खेल के मैदान, मिनी स्टेडियम, स्टेडियम और इंटरनेशनल स्टेडियम विकसित किए जा रहे हैं।
हर कमिश्नरी में स्पोर्ट्स कॉलेज और उनमें Centre of Excellence स्थापित किए जा रहे हैं, जहां खिलाड़ियों को International Standard की प्रैक्टिस, बेहतर कोचिंग और आवश्यक सुविधाएं मिलेंगी। आज उत्तर प्रदेश के पास अपनी Sports University भी है।
हमारा लक्ष्य स्पष्ट है- प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं देकर उन्हें नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना।
उत्तर प्रदेश में खेल अवसंरचना (Sports Infrastructure) के विकास और अतिक्रमण हटाने की मुहीम को लेकर सरकार के दावों तथा सार्वजनिक चर्चाओं में विभिन्न पहलू शामिल हैं:

सरकार और समर्थकों का दृष्टिकोण: राज्य सरकार का मानना है कि अतिक्रमण मुक्त कराई गई भूमि का उपयोग जनहित और युवाओं के भविष्य के लिए किया जा रहा है। स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी (मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय, मेरठ), कमिश्नरी स्तर पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, मिनी स्टेडियम और ग्रामीण खेल मैदानों के निर्माण से प्रदेश के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं, आधुनिक कोचिंग और प्रशिक्षण मिल रहा है, जिससे ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया’ अभियानों को मजबूती मिल रही है।
आलोचकों और विपक्ष का दृष्टिकोण: विपक्षी दलों और आलोचकों का तर्क है कि भूमि अधिग्रहण और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और पुनर्वास नीति का ध्यान रखा जाना आवश्यक है। इसके अलावा, उनका कहना है कि केवल बुनियादी ढांचे का निर्माण पर्याप्त नहीं है; ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में इन खेल परिसरों का रखरखाव, योग्य कोचों की नियमित नियुक्ति और खिलाड़ियों को वित्तीय सहायता व रोजगार के अवसर प्रदान करना अधिक महत्वपूर्ण है।
