प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 139वें संस्करण में देशवासियों को सम्बोधित करते हुए कहा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 139वें संस्करण में देशवासियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि त्योहारों के इस पावन अवसर पर चारों ओर एक सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट दिखाई दे रहा है। आज नागरिक खरीदारी करते समय स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
बिहार के पूर्णिया का मखाना हो या कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल, ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना से प्रेरित होकर भारतीय उत्पाद अब विश्व के बाजारों तक पहुंच रहे हैं। यह प्रगति दर्शाती है कि भारत के परिश्रमी किसानों के लिए वैश्विक स्तर पर नये अवसर उत्पन्न हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस वक्तव्य में ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दूरदर्शी दृष्टिकोण का एक बहुत ही सुंदर और प्रेरक संदेश निहित है।
सकारात्मक बदलाव और जन-भागीदारी: त्योहारों के मौसम में स्वदेशी उत्पादों की खरीदारी केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय संस्कृति बनती जा रही है। नागरिकों की यह सोच स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधे मजबूती प्रदान कर रही है।
स्थानीय से वैश्विक (Local to Global):
बिहार (पूर्णिया) का मखाना: अपनी पौष्टिकता और गुणवत्ता के कारण अब केवल देश में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुपरफूड के रूप में पहचान बना रहा है।
कर्नाटक (कलबुर्गी) की अरहर (तुअर) दाल: अपने विशिष्ट स्वाद और गुणवत्ता (जीआई टैग / GI Tag पहचान) के साथ वैश्विक बाजारों तक पहुंच रही है।
किसानों और कारीगरों का सशक्तिकरण: जब स्थानीय उत्पाद वैश्विक मंच पर पहुंचते हैं, तो इसका सीधा लाभ हमारे कठिन परिश्रम करने वाले किसानों, छोटे उद्यमियों और कारीगरों को मिलता है, जिससे उनकी आय और अवसर दोनों बढ़ते हैं।
यह प्रगति इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि “मेक इन इंडिया” और “वोकल फॉर लोकल” की भावना भारत को आर्थिक रूप से सशक्त और स्वावलंबी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक क्रांति सिद्ध हो रही है।
