2014 के बाद बने 50 हजार आधुनिक कोच
2014 के बाद देश में बने 50,000 से अधिक आधुनिक रेल कोच: आधुनिक भारत की रफ्तार पर विपक्ष पर तंज
नई दिल्ली: भारतीय रेल के आधुनिकीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में आए अभूतपूर्व बदलाव को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में एक नया बहस-छिड़ गया है। 2014 के बाद देश में रेलवे के बुनियादी ढांचे और विनिर्माण क्षमता में हुए रिकॉर्ड सुधार के आंकड़ों को साझा करते हुए समर्थकों और सरकार के पक्षकारों ने विपक्षी दलों पर तीखा तंज कसा है।
50 हजार आधुनिक रेल कोचों का रिकॉर्ड उत्पादन भारतीय रेलवे के मेक इन इंडिया (Make in India) अभियान के तहत देश की रेल उत्पादन इकाइयों ने मेक-ओवर का नया कीर्तिमान स्थापित किया है:
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आधुनिक रेल डिब्बों का निर्माण: वर्ष 2014 के बाद से देश में 50,000 से अधिक आधुनिक और सुरक्षा मानकों से लैस रेल कोचों (LHB एवं वंदे भारत रैक) का निर्माण किया जा चुका है।
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यात्री सुविधाओं में क्रांतिकारी बदलाव: इन आधुनिक डिब्बों में बायो-टॉयलेट, स्वचालित दरवाजे, जीपीएस आधारित सूचना प्रणाली और बेहतर सस्पेंशन तकनीक शामिल है, जिससे भारतीय रेल का सफर सुरक्षित और आरामदायक हुआ है।
बुनियादी ढांचे और स्वच्छ भारत की तुलना पर तंज प्रशासनिक प्रगति की गति को रेखांकित करते हुए विपक्ष के पिछले रिकॉर्ड्स पर चुटकी ली गई है:
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तुलनात्मक तंज: सोशल मीडिया पर जारी बयानों में कहा गया कि जहाँ 2014 के बाद देश में 50 हजार अत्याधुनिक रेल डिब्बे बनकर तैयार हो गए, वहीं पिछली सरकारों के कार्यकाल में बुनियादी स्वच्छता और टॉयलेट निर्माण जैसी प्राथमिक जरूरतों पर भी वह गति देखने को नहीं मिली थी।
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विकास की नई रफ्तार: तेज गति से चल रही वंदे भारत ट्रेनों, नमो भारत (RRTS) और रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास को देश की नई कार्य संस्कृति का प्रतीक बताया जा रहा है।
देश में रेलवे नेटवर्क के तेजी से होते बिजलीकरण और आधुनिक डिब्बों के समावेश ने न केवल आम यात्रियों के अनुभव को बदला है, बल्कि यह बदलते और आधुनिक भारत की एक मजबूत तस्वीर भी पेश कर रहा है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

