हैदराबाद में इंजीनियर के घर 100 करोड़

सरकारी इंजीनियर की अकूत दौलत: 4 फ्लैट, 5 प्लॉट, विला और लग्जरी कारें; हैदराबाद में करोड़ों के काले साम्राज्य का भंडाफोड़

डिजिटल डेस्क, हैदराबाद: तेलंगाना के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (HMDA) के चीफ इंजीनियर बी. रविंदर के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) के इस मामले में अब तक मिली बेहिसाब संपत्ति को देखकर खुद जांच अधिकारी भी दंग रह गए हैं।

दस्तावेजी और सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार बरामद की गई संपत्ति की सरकारी कीमत भले ही लगभग ₹9.24 करोड़ आंकी गई है, लेकिन जांच एजेंसी का अनुमान है कि इसका वास्तविक बाजार मूल्य ₹50 करोड़ से ₹100 करोड़ से भी अधिक है। भ्रष्टाचार के इस गंभीर मामले में आरोपी अधिकारी बी. रविंदर को गिरफ्तार कर लिया गया है।

छापेमारी में क्या-क्या हुआ बरामद?

एसीबी (ACB) की टीमों ने चीफ इंजीनियर बी. रविंदर के दफ्तर, घर और उनके रिश्तेदारों व करीबियों से जुड़े 11 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस दौरान अकूत अचल संपत्तियों के साथ-साथ भारी मात्रा में कैश, सोना और विलासिता का सामान बरामद हुआ है:

  • शानदार फ्लैट्स और प्लॉट्स: नार्सिंगी और नानकरामगुडा जैसे रिहायशी इलाकों में 4 लग्जरी फ्लैट्स (कीमत लगभग ₹2.07 करोड़) और कोंडाकल, किस्तापुर व पासमाला में 5 ओपन प्लॉट्स बरामद हुए हैं।

  • आलीशान विला और बहुमंजिला इमारत: मोकिला में एक अर्ध-निर्मित आलीशान विला (कीमत ₹1.33 करोड़) और कोंडापुर के मस्जिद बांदा इलाके में एक बड़ी G+4 (पांच मंजिला) इमारत मिली है, जिसका बाजार मूल्य करोड़ों में है।

  • सोना, चांदी और भारी कैश: तलाशी के दौरान करीब 1.44 किलोग्राम सोने के आभूषण (कीमत करीब ₹36.7 लाख), 12.5 किलोग्राम चांदी (कीमत करीब ₹10 लाख), लगभग ₹3.82 लाख नकद और विभिन्न बैंक खातों में ₹45.05 लाख की जमा राशि पाई गई है।

  • कृषि भूमि और लग्जरी गाड़ियों का काफिला: कोथुर और शमशाबाद इलाके में 4 एकड़ से अधिक की कृषि भूमि के दस्तावेज मिले हैं। इसके साथ ही ₹1.16 करोड़ मूल्य की 4 लग्जरी गाड़ियां (जैसे Toyota Innova Hycross, Tata Safari, Innova Crysta, और Mahindra XUV) भी जब्त की गई हैं।

1985 में शुरू हुई थी नौकरी, अब कोर्ट में पेशी

जांच अधिकारियों के अनुसार, बी. रविंदर मूल रूप से निजामाबाद के रहने वाले हैं। उन्होंने साल 1985 में तत्कालीन हैदराबाद अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (HUDA) में एक सहायक अभियंता (Assistant Engineer) के रूप में सरकारी सेवा की शुरुआत की थी, जो बाद में वर्ष 2008 में हुडा से एचएमडीए (HMDA) बन गई। 4 दशकों की इस नौकरी के दौरान उन्होंने भ्रष्टाचार के जरिए अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की।

एसीबी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को न्यायिक रिमांड के लिए हैदराबाद की विशेष अदालत के समक्ष पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एजेंसी अब बेनामी संपत्तियों और बैंक लॉकरों की गहराई से जांच कर रही है, जिससे इस काले खजाने में और इजाफा होने की पूरी संभावना है।


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