वरुण गांधी थामेंगे कांग्रेस का हाथ?
Gandhi Brothers Reunion: क्या एक होने जा रहे हैं राहुल और वरुण गांधी? चचेरे भाइयों की नजदीकियों ने बढ़ाई सियासत की गर्मी!
नई दिल्ली (राजनीतिक डेस्क): भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित परिवार ‘गांधी परिवार’ से एक ऐसी खबर निकलकर सामने आ रही है, जिसने दिल्ली से लेकर यूपी तक की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। लंबे समय से अलग-अलग विचारधाराओं और पार्टियों (कांग्रेस और बीजेपी) में रहे राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और वरुण गांधी (Varun Gandhi) के एक साथ आने की अटकलें अब तेज हो गई हैं।
क्या टूटेगी दशकों की सियासी दीवार?
संजय गांधी और राजीव गांधी के बेटों के बीच की दूरी जगजाहिर रही है। लेकिन हाल के दिनों में वरुण गांधी की अपनी ही पार्टी (BJP) से बढ़ती दूरियों और राहुल गांधी की ‘मोहब्बत की दुकान’ वाली राजनीति ने इन कयासों को हवा दी है कि दोनों भाई अब एक मंच पर दिख सकते हैं। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि अगर वरुण गांधी कांग्रेस का हाथ थामते हैं, तो यह उत्तर प्रदेश में विपक्षी गठबंधन के लिए ‘मास्टरस्ट्रोक’ साबित होगा।
वरुण गांधी का बागी तेवर और भविष्य की राह
पिछले कुछ समय से वरुण गांधी अपनी ही सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते नजर आए हैं। बेरोजगारी, किसान और महंगाई जैसे मुद्दों पर उनके बेबाक बयानों ने यह साफ कर दिया था कि वह बीजेपी में सहज महसूस नहीं कर रहे हैं। दूसरी ओर, राहुल गांधी ने भी कई मौकों पर कहा है कि विचारधारा की लड़ाई अपनी जगह है, लेकिन परिवार के प्रति सम्मान हमेशा रहेगा।
सोशल मीडिया पर ‘भाई-भाई’ की चर्चा
जैसे ही दोनों के एक होने की खबरें सोशल मीडिया पर आईं, समर्थकों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई। लोग इसे ‘गांधी परिवार की घर वापसी’ कह रहे हैं। हालांकि, अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि (Official Confirmation) नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि पर्दे के पीछे बातचीत का दौर जारी है।
राजनीतिक समीकरणों पर क्या होगा असर?
-
UP का गणित: वरुण गांधी की पीलीभीत और सुल्तानपुर जैसे इलाकों में मजबूत पकड़ है। उनके आने से कांग्रेस को जमीन पर मजबूती मिलेगी।
-
बीजेपी को झटका: वरुण का जाना बीजेपी के लिए एक बड़े चेहरे का नुकसान हो सकता है।
-
विपक्ष की एकता: राहुल-वरुण की जोड़ी मोदी लहर के खिलाफ एक नया नैरेटिव सेट कर सकती है।
और अपडेट्स के लिए हमसे जुड़े रहें।

