क्या इस साल देश में पड़ेगा सूखा?
क्या इस साल पड़ेगा सूखा? उमस से झुलसी दिल्ली, बारिश को तरसे यूपी-बिहार
नई दिल्ली: देश के कई हिस्से इस समय भीषण गर्मी और उमस की मार झेल रहे हैं। देश की राजधानी दिल्ली जहां 51°C की भयानक उमस (Heat Index) से झुलस रही है, वहीं उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई राज्य मानसून की सामान्य बारिश के लिए तरस रहे हैं। मौसम के इस बदलते मिजाज और मानसून की सुस्त रफ्तार ने अब सूखे (Drought) की चिंताओं को बढ़ा दिया है।
शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, शनिवार तक देशभर में मानसून की बारिश में 43% की भारी कमी दर्ज की गई है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले महीने तक मानसून पूरे देश को कवर कर लेगा, लेकिन इसके बावजूद इस सीजन में सामान्य से काफी कम बारिश होने की आशंका जताई जा रही है।
एल नीनो (El Niño) और न्यूट्रल आईओडी (IOD) का डबल अटैक
मौसम विभाग (IMD) और जलवायु विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल मानसून पर दो प्रमुख वैश्विक मौसमी कारकों का नकारात्मक असर पड़ रहा है:
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10% से अधिक की कमी की संभावना: एल नीनो के प्रभाव और भारतीय महासागर डाइपोल (IOD) की तटस्थ (Neutral) स्थिति के कारण इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि यह पूरा मानसून सीजन कुल मिलाकर 10% से ज्यादा की बारिश के घाटे (Deficit) के साथ समाप्त हो।
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क्या होता है IOD का असर? आमतौर पर, जब प्रशांत महासागर में ‘एल नीनो’ सक्रिय होता है, तो भारत में मानसून कमजोर पड़ता है। लेकिन अगर हिंद महासागर में पॉजिटिव आईओडी (Positive IOD) सक्रिय हो, तो वह एल नीनो के बुरे प्रभाव को कम कर देता है।
2023 का उदाहरण: वर्ष 2023 में एक मजबूत एल नीनो सक्रिय था, लेकिन हिंद महासागर के ‘पॉजिटिव आईओडी’ ने देश को बचा लिया और सूखे जैसी स्थिति नहीं बनने दी, जिससे देश में लगभग सामान्य बारिश दर्ज की गई थी।
इस बार क्यों बढ़ रही है चिंता?
इस साल सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि एल नीनो के प्रभाव को कम करने वाला आईओडी (IOD) फिलहाल न्यूट्रल यानी तटस्थ बना हुआ है। इसके सक्रिय न होने के कारण एल नीनो को रोकने वाला कोई मजबूत कारक मौजूद नहीं है। यदि आगामी हफ्तों में मानसून की रफ्तार नहीं सुधरी, तो उत्तर और मध्य भारत के कृषि क्षेत्रों को गंभीर जल संकट और सूखे जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक
(एडिटर (Allrights Magazine

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