शव को नहलाने की क्या है परंपरा

मृत्यु के बाद शव को स्नान कराने और कपड़े पहनाने की परंपरा; जानिए इसका आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व

रिपोर्ट: धर्म व संस्कृति ब्यूरो

नई दिल्ली: सनातन परंपरा में मृत्यु को जीवन का अंत नहीं, बल्कि आत्मा का एक नया मोड़ माना गया है। गीता के अनुसार, आत्मा अजर-अमर है और वह केवल पुराना वस्त्र (शरीर) बदलकर नई यात्रा पर निकलती है। हिंदू धर्म में किसी व्यक्ति के निधन के बाद किए जाने वाले समस्त 16 संस्कारों में अंतिम संस्कार का विशेष स्थान है।

अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में शव को जल से स्नान कराना और नए वस्त्र (सफेद या मांगलिक वस्त्र) पहनाना एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है। लेकिन इसके पीछे का धार्मिक, वैज्ञानिक और पौराणिक कारण क्या है? आइए जानते हैं।

1. शरीर रूपी ‘पात्र’ का सम्मान

हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार, यह भौतिक शरीर वह पवित्र पात्र है, जिसने आत्मा को इस जीवनकाल में धारण किया और उसे विभिन्न कर्म करने का अवसर दिया। जब आत्मा इस शरीर को छोड़ती है, तो उस पंचभौतिक शरीर को अग्नि को समर्पित (दाह संस्कार) करने से पहले उसका पूर्ण आदर और सम्मान किया जाता है। स्नान कराना उसी सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने का एक माध्यम है।

2. सांसारिक अशुद्धियों से मुक्ति और शुद्धि

सनातन धर्म में स्वच्छता और पवित्रता का गहरा आध्यात्मिक महत्व है। जीवनभर मनुष्य विभिन्न कर्मों और भौतिक वातावरण से जुड़ा रहता है। गरुड़ पुराण के अनुसार, आत्मा की आगे की ऊर्ध्व लोक या मोक्ष की यात्रा पर निकलने से पहले, मृत शरीर को स्नान कराकर उसे सांसारिक अशुद्धियों से मुक्त किया जाता है, ताकि आत्मा निर्मल भाव से विदा हो सके।

3. सफेद और बिना सिले वस्त्रों का महत्व

स्नान के बाद शव को नए वस्त्र पहनाए जाते हैं। पुरुषों और विधवा महिलाओं के लिए मुख्यतः सफेद वस्त्र का उपयोग किया जाता है, जो शांति, वैराग्य, पवित्रता और सांसारिक मोह-माया के समाप्त होने का प्रतिनिधित्व करता है। (सुहागिन महिलाओं के लिए अंतिम विदाई में लाल या पीली रंग की साड़ी का प्रयोग किया जाता है, जो उनके अखंड सौभाग्य का प्रतीक है)।

4. गरुड़ पुराण में उल्लेख

गरुड़ पुराण में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि मृत शरीर के प्रति किसी भी प्रकार का अनादर नहीं होना चाहिए। स्नान के दौरान जल में तिल, गंगाजल या तुलसी की पत्तियां मिलाकर शरीर का मार्जन किया जाता है, जिससे शरीर को अंतिम विदाई देते समय वातावरण में नकारात्मकता समाप्त हो और पवित्रता का संचार हो।

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सीनियर एडिटर गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

रिपोर्ट: क्राइम व लोकल न्यूज़ ब्यूरो, ऑल राइट्स मैगजीन, बरेली (उत्तर प्रदेश)


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