दिल्ली के भूजल में यूरेनियम, स्वास्थ्य संकट

दिल्ली में भूजल में यूरेनियम बढ़ा, स्वास्थ्य संकट गहरा

दिल्ली के भूजल में यूरेनियम की मात्रा सुरक्षित सीमा से अधिक पाए जाने से स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञ इसे ‘साइलेंट हेल्थ इमरजेंसी बता रहे हैं क्योंकि इसके लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं।

मुख्य खतरे

नर्वस सिस्टम और दिमाग प्रभावित
किडनी, हड्डी और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव
लंबे समय तक सेवन से याददाश्त, सीखने की क्षमता और मूड प्रभावित

एम्स के डॉ. हर्षल आर. साल्वे के अनुसार यूरेनियम से न्यूरो-टॉक्सिसिटी होती है, जिससे तनाव, अवसाद और एंग्जायटी बढ़ती है।

कितना यूरेनियम मिला

केंद्रीय भूजल बोर्ड 2025 की रिपोर्ट के अनुसार 103 नमूनों में 12.63 सुरक्षित सीमा (30 पीपीबी) से अधिक पाए गए।
कुछ इलाकों में यूरेनियम 59 पीपीबी तक पहुंच गया।
गंभीर क्षेत्र: उत्तरी दिल्ली, उत्तर-पश्चिमी, पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली, रोहिणी, भलस्वा झील क्षेत्र, नांगली राजपुरा।

लक्षण और असर

ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, चिड़चिड़ापन
नींद में गड़बड़ी, मानसिक थकान
बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष रूप से गंभीर खतरा

प्रो. डॉ. अनंत मोहन (एम्स के अनुसार लंबे समय तक यूरेनियम युक्त पानी से ब्रेन सेल्स की कार्यक्षमता धीमी होती है।

सुरक्षा उपाय

भूजल का सीधा सेवन न करें, विशेषकर हैंडपंप और बोरवेल का पानी
आरओ आधारित फिल्टर का इस्तेमाल करें
बच्चों को प्रभावित पानी से दूर रखें
भूजल गुणवत्ता की नियमित निगरानी और प्रदूषण स्रोतों की पहचान जरूरी

विशेष जानकारी

भारत में यूरेनियम की सुरक्षित सीमा: 30 माइक्रोग्राम/लीटर (30 पीपीबी
यूरेनियम को ‘धीमा ज़हर’ और साइलेंट किलर कहा जाता है क्योंकि यह बिना लक्षण शरीर में जमा होकर गुर्दे, हड्डी, लीवर और दिमाग को प्रभावित करता है।

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